कृषि कानूनों के खिलाफ हरियाणा के जींद में महापंचायत, राकेश टिकैत होंगे महापंचायत में शामिल

जींद और रोहतक में राकेश टिकैत की महापंचायत आज, स्वागत के लिए आये कई क्विंटल  फूल

कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक हंगामा मचा हुआ है। दिल्ली के सीमाओं पर जहां किसान डटे हुए हैं, वहीं संसद में विपक्ष सरकार पर हमलावर है। इन सबके बीच किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) आंदोलन से जुड़ी आगे की रणनीति तय करने आज हरियाणा के जींद जाएंगे, हां एक महापंचायत आयोजित की गई है। राकेश टिकैत ने संकेत दिया कि किसानों का विरोध अक्टूबर से पहले खत्म नहीं होने जा रहा है।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के समर्थन में हरियाणा के जींद जिले में किसानों की महापंचायत में शामिल होंगे। सर्वजातीय कंडेला खाप के प्रमुख टेकराम कंडेला ने मंगलवार को बताया कि कार्यक्रम के लिए जींद के कंडेला गांव में पर्याप्त व्यवस्था की गयी है। टिकैत के अलावा कई खाप नेता भी इसमें शामिल होंगे।

कंडेला ने कहा कि किसानों के आंदोलन का समर्थन करने के लिए यह बड़ा जमावड़ा होगा। करीब दो दशक पहले हरियाणा में किसानों का आंदोलन चलाने वाली कंडेला खाप ने कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को अपना समर्थन दिया है। दूसरी खाप ने भी आंदोलन का समर्थन किया है।

टेकराम कंडेला ने कहा कि बुधवार के कार्यक्रम में कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी की मांग की जाएगी। बहरहाल, हरियाणा के भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी हिसार जिले के उकलाना में सूरेवाला चौक पहुंचे और किसानों को संबोधित किया।

उन्होंने छह फरवरी को किसान यूनियनों द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी चक्का जाम का समर्थन करने को कहा। चढूनी ने किसानों के आंदोलन के मुख्य स्थलों में से एक गाजीपुर में प्रवेश रोकने के लिए बड़े-बड़े अवरोधक लगाए जाने की आलोचना की।

किले में तब्दील हुआ गाजीपुर बॉर्डर

दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित गाजीपुर को किले में तब्दील कर दिया गया है। हालंकि, भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के एक नेता ने दावा किया कि दूर दराज के इलाकों से समर्थक आंदोलन के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए अब भी आ रहे हैं। बीकेयू के मेरठ क्षेत्र के प्रमुख पवन खटाना ने कहा, ‘‘लेकिन सरकार के इस सुरक्षा इंतजाम का क्या मतलब है। कई स्तर पर अवरोधक लगाया जाना, हमारे सभी ओर की सड़कों पर लोहे की कीलें, कंटीलें तार लगाया जाना। इंसान को भूल जाइए, कोई जानवर को भी इस तरह से नहीं रखता।”

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