हिमालय प्रहरी

अगर हो कैसी भी बवासीर , पाए घर बैठे छुटकारा….जाने खबर में!

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पाइल्स’ या ‘बवासीर’ निचले गुदाशय या गुदा के पास सूजन नसों को बवासीर के रूप में जाना जाता है। बाहरी बवासीर गुदा के बाहर होते हैं। जबकि आंतरिक बवासीर गुदाशय या गुदा के भीतर होते हैं।बवासीर गंभीर खुजली, बैठे और दर्द में कठिनाई का कारण बनता है। खूनी बवासीर में किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती है। इसमें मलत्याग करते समय खून आता है। इसमें गुदा के अन्दर मस्से हो जाते हैं। मलत्याग के समय खून मल के साथ थोड़ा-थोड़ा टपकता है, या पिचकारी के रूप में आने लगता है। मल त्यागने के बाद मस्से अपने से ही अन्दर चले जाते हैं। गंभीर अवस्था में यह हाथ से दबाने पर भी अन्दर नहीं जाते। इस तरह के बवासीर का तुरंत उपचार कराएं।

बवासीर के लक्षण:–कब्ज एवं गैस की समस्या बनी ही रहती है। मल पास करते समय रक्त, खुजली, मलाशय में दर्दनाक कठोर गांठ, गुदा क्षेत्र में सूजन, शौच के बाद भी पेट साफ ना हेने का आभास होना। वह स्वस्थ तरह से चल-फिर नहीं पाता, और बैठने में भी तकलीफ महसूस करता है। इलाज कराने से यह समस्या ठीक हो जाती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 ग्राम काले तिल पिसकर, 10-15 ग्राम मख्खन के साथ मिलाकर सुबह सुबह खा लो । कैसा भी बवासीर हो मिट जाता है। साथ ही नारियल की जटा लीजिए। उसे माचिस से जला दीजिए। जलकर भस्म बन जाएगी। इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए। कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ नारियल की जटा से बनी भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है। ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो। कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है।

बड़ी इलायची को पचास ग्राम की मात्रा में तवे पर भून लें। और जब यह ठंडी हो जाए तब इसे कूट कर इसका चूर्ण बना लें। रोज सुबह पानी के साथ इस चूर्ण का सेवन करें। इस घरेलू उपचार से आपको बवासीर से राहत मिलेगी।

साथ ही करीब दो लीटर ताजी छाछ लेकर उसमें 50 ग्राम जीरा पीसकर एवं थोड़ा-सा नमक मिला दें। जब भी पानी पीने की प्यास लगे तब पानी की जगह पर यह छाछ पी लें। पूरे दिन पानी के बदले में यह छाछ ही पियें। चार दिन तक यह प्रयोग करें। मस्से ठीक हो जायेंगे। चार दिन के बदले सात दिन प्रयोग जारी रखें तो अच्छा है।

1-छाछ में सोंठ का चूर्ण, सेंधा नमक, पिसा जीरा व जरा-सी हींग डालकर सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।

नीम का तेल मस्सों पर लगाने से एवं 4-5 बूँद रोज पीने से लाभ होता है।

बवासीर में क्या खाये : 1.करेले का रस, लस्सी, पानी।

2. दलिया, दही चावल, मूंग दाल की खिचड़ी, देशी घी।

3.खाना खाने के बाद अमरुद खाना भी फायदेमंद है।

4. फलों में केला, कच्चा नारियल, आंवला, अंजीर, अनार, पपीता खाये।

5. सब्जियों में पालक, गाजर, चुकंदर, टमाटर, तुरई, जिमीकंद, मूली खाये।

बवासीर में परहेज क्या करे:
1. तेज मिर्च मसालेदार चटपटे खाने से परहेज करे।

2. मांस मछली, उडद की दाल, बासी खाना, खटाई ना खाएं।

3. डिब्बा बंद भोजन, आलू, बैंगन,

वही बता दे कि बवासीर एक ऐसी बीमारी है, जो बेहद तकलीफदेह होती है। इसमें गुदा के अंदर और बाहर तथा मलाशय के निचले हिस्से में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से गुदा के अन्दर और बाहर, या किसी एक जगह पर मस्से बन जाते हैं। मस्से कभी अन्दर रहते हैंए तो कभी बाहर आ जाते हैं। करीब 60 फीसदी लोगों को उम्र के किसी न किसी पड़ाव में बवासीर की समस्या होती है। रोगी को सही समय पर पाइल्स का इलाज ;च्पसमे ज्तमंजउमदजद्ध कराना बेहद ज़रूरी होता है। समय पर बवासीर का उपचार नहीं कराया गया तो तकलीफ काफी बढ़ जाती है।इसी के साथ ही  शराब, तम्बाकू, जादा चाय और कॉफ़ी के सेवन से भी बचेl

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