राजस्थान के अलवर जिले के राजगढ़ में 300 साल पुराने मंदिर सहित तीन मंदिरों, मकान और दुकानों पर बुलडोजर चलाए जाने को लेकर विवाद जारी है। भाजपा प्रदेश व्यापी आंदोलन की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस भी हमलावर बनी हुई है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र सिह ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार मंदिर बनाएगी, मूर्तियों की विधि-विधान से स्थापना कराई जाएगी। नगर पालिका के सभापति के साथ ही मंदिर तोड़ने वाले अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज होगी। अलवर के कलेक्टर नकाते शिवप्रसाद मदन ने कहा कि जिन तीन मंदिरों को तोड़ा गया है, उनका फिर उसी स्थान पर पुनर्निर्माण होगा। इस मंदिर का निर्माण अलवर के कच्छवाहा वंश के शासक प्रताप सिंह नरूका (1775-1790 ई.) और बख्तावर सिंह (1790-1815 ई.) के शासन में कराया गया था।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि राज्यपाल को ज्ञापन देकर आंदोलन शुरू किया जाएगा। नगर पालिका के बोर्ड में पारित प्रस्ताव में मंदिर तोड़ने का उल्लेख नहीं किया गया। प्रस्ताव में मास्टर प्लान के अनुसार गौरव पथ बनाने का उल्लेख था, लेकिन यह नहीं लिखा गया था कि सड़क कितनी चौड़ी करनी है। अधिकारियों ने कांग्रेस विधायक जौहरीलाल मीणा के इशारे पर मंदिर, मकान और दुकानों पर बुलडोजर चलाया था। राज्य के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जुली का कहना है कि सभापति सतीश दहरिया की अध्यक्षता में भाजपा शासित बोर्ड ने तोड़फोड़ करने का निर्णय लिया है। सरकार मंदिरों का पुनर्निमाण कराने के साथ ही जिन लोगों के पास मकान और दुकान के दस्तावेज हैं, उन्हे मुआवजा देगी। रविवार को अधिकारियों के साथ बैठक के बाद कलेक्टर शिवप्रसाद मदन ने कहा कि मंदिर, मकान और दुकान तोड़ने का निर्णय नगर पालिका के बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित कर लिया गया था। इस संबंध में जिला प्रशासन को सूचना नहीं दी गई थी।
लोग हो रहे परेशान
तोड़फोड़ के बाद लोग परेशान हो रहे हैं। हालात यह है कि जो 45 दुकानें तोड़ी गई, उनके मालिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। व्यापारी योगेश गवारिया ने कहा कि 40 साल से दुकान थी। चार बच्चों का पालन-पोषण दुकान से ही करता था। एक बच्चा विकलांग है। तोड़फोड़ करने से पहले दुकान से सामान निकालने का समय भी नहीं दिया। दुकान के साथ मकान का आधा हिस्सा तोड़ दिया गया। 50 वर्षीय दुकानदार भागचंद का कहना है कि दुकान के ऊपर बने एक कमरे में पांच लोगों का परिवार रहता था। 17 अप्रैल को दुकान और कमरा दोनों गिरा दिए। अब समझ में नहीं आ रहा कि परिवार को कहां रखें, अभी तो एक परिजन के घर में रह रहे हैं।
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