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चर्चा में हैं यह अनोखे ‘पत्ता बाबा’, 18 घंटे तक बैठते हैं बर्फ पर, पत्तों से इलाज करने का दावा, दूर-दूर से आते हैं लोग

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बाबाओं की रहस्यमई दुनिया आपने जरूर देखी या सुनी होगी. यही नहीं बाबाओं की अपनी-अपनी पहचान और खासियत होती है. उनकी कार्यशाली भी अलग होती है. उनकी पहचान भी एक विशेष नाम से होती है. भक्त अपने बाबा, अपने गुरु के प्रति अपार श्रद्धा रखते हैं. ऐसे ही एक बाबा हैं उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में, जो बर्फ के सिंहासन नुमा आसन पर बैठकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं. उनके कष्ट भी एक पत्ते से हर लेते हैं. इसी कारण लोग उनको ‘पत्ता बाबा’ के नाम से जानते और पहचानते हैं.

दरअसल, मिर्जापुर जिले का बरईपुर गांव वाराणसी बॉर्डर के पास स्थित है. यहां पर बृक्षोपल्ली सेवा आश्रम है, जिसके महंत स्वामी रामानंद जी महराज हैं. इनकी खासियत यह है कि यह बर्फ की सिल्लियों के बीच और उसके ऊपर 18 घंटे तक बिना हिले ही बैठे रहते हैं और अपने भक्तों को दर्शन देते हैं. यह सिलसिला सुबह से लेकर देर रात तक चलता रहता है. भक्त भी बाबा की भक्ति में लीन होकर नाचते-गाते रहते हैं.

पत्ते से करते हैं बड़ी-बड़ी बीमारियों का इलाज

यह कहा जाता है कि स्वामी रामानंद जी महराज अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं. उनके भक्त दावा करते हैं कि वह बड़ी-बड़ी बीमारियों का इलाज मात्र पत्ते से करते हैं. स्वामी रामानंद जी अपने भक्तों के बीच में काफी फेमस हैं और दूर-दूर से लोग यहां आते हैं. भक्त बताते हैं कि पीड़ित के शरीर में पत्ता फेरते ही रोग ग्रसित व्यक्ति ठीक हो जाता है. बाबा के धाम में आने वाले भक्तों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है.

गुरु पूर्णिमा के दिन आश्रम में लगती है भीड़

वैसे तो यहां हमेशा से ही भक्तों के आने का सिलसिला लगा रहता है, लेकिन गुरु पूर्णिमा के दिन यहां हजारों लोग अपने गुरु की झलक पाने को बेताब थे. पूरा आश्रम भी सुंदर तरीके से सजाया गया था. लोग लाइनों में लगकर बाबा के चरणों में मत्था टेक रहे थे और आशीर्वाद ले रहे थे. इसमें बच्चे बूढ़े, महिलाएं आदि शामिल थे.

बाबा को लेकर भक्तों की अपार आस्था

आश्रम में आने वाले भक्त भी बाबा के प्रति अपार आस्था रखते हैं. उनका कहना है कि बाबा हम लोगों की समस्या और बीमारियों को एक झटके में ठीक कर देते हैं. इसलिए भक्तों के बीच में बाबा की प्रतिष्ठा बढ़ती ही जा रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा बर्फ से बने आसन पर साल में सिर्फ एक बार ही बैठते हैं और वह दिन होता है गुरु पूर्णिमा का, जिस दिन वह घंटों बर्फ में बैठे रहते हैं.

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