हिमालय प्रहरी

पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम : अगर आप हैं अपनी बीबी से परेशान, तो रह सकते है इस आश्रम में

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14 जून को देश में वट सावित्री व्रत मनाया गया था। पत्नियों ने पति के लिए श्रृंगार किया, उनकी लंबी उम्र की कामना की और व्रत रखा। हालांकि वट सावित्री का व्रत क्यों रखा जाता है इस बात से हर कोई वाकिफ है। लेकिन महाराष्ट्र के औरंगाबाद में ऐसा कुछ हुआ कि आप सुनकर दंग रह जाएंगे। यहां पत्नी से परेशान पुरुषों ने वट सावित्री व्रत से एक दिन पहले पीपल के पेड़ की परिक्रमा लगाकर प्रार्थना की कि उन्हें अगले जन्म में ऐसी पत्नी ना मिले।

पीपल की उल्टी परिक्रमा

वट सावित्री व्रत से एक दिन पहले इस आश्रम  में रहने वाले पत्नी पीड़ितों ने पेड़ की 108 उल्टी परिक्रमाएं कीं। पत्नी पीड़ितों ने प्रार्थना की कि अगले जन्म में उन्हें ऐसी पत्नी ना मिले। आश्रम के संस्थापक भरत फुलारे ने कहा है कि वट सावित्री व्रत पर महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन और सात जन्मों के लिए एक ही पति पाने की प्रार्थना करती हैं। इससे एक दिन पहले हमने यहां एक पीपल के पेड़ की पूजा की और प्रार्थना की कि ऐसा जीवन साथी दोबारा न मिले।

यहां बना है पत्नी पीड़ित आश्रम

औरंगाबाद में अपनी पत्नी से खुश ना रहने वाले पतियों ने एक पत्नी पीड़ित आश्रम बनाया हुआ है। औरंगाबाद से करीब 12 किलोमीटर दूर मुंबई-शिरडी हाइवे पर ये आश्रम बना हुआ है। बताया जाता है कि यहां पत्नी पीड़ित पुरुषों को कानूनी लड़ाई से जुड़ी सलाह दी जाती है। इस आश्रम में कौए की एक प्रतिमा भी है, जिसकी पूजा होती है। बताया जाता है कि अबतक 500 लोग से अधिक पत्नी पीड़ित पति यहां से सलाह ले चुके हैं।

ऐसे हुई आश्रम की शुरुआत

खबरों के मुताबिक इस आश्रम की शुरूआत भरत फुलारे ने की थी। उन्होंने अपने निजी अनुभव के बाद इस आश्रम की स्थापना की। बताया जाता है कि भरत फुलाते की पत्नी ने उन पर घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद उनके जीवन में काफी मुश्किलें आईं और किसी तरह की कानूनी सलाह मिलना भी मुश्किल हो गया। इसके बाद उन्हें अपने जैसे कुछ और लोग मिले और उनके मन में कानूनी लड़ाई लड़ने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने साल 2016 में इस आश्रम की शुरूआत की। बताया जाता है कि इस आश्रम का सदस्य बनना या इसमें एंट्री लेना इतना आसान नहीं है। इसके लिए पत्नी की ओर से आप पर 20 मामले दर्ज होना जरूरी है। इसके बाद ही आपको इस आश्रम में एंट्री मिलती है।

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