हिमालय प्रहरी

परिवहन निगम के बस अड्डो का होगा निजीकरण

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार भी निजीकरकण की राह पर चल पड़ी है। इस शुरूआत परिवहन निगम के बस अड्डो से की जा रही है। शुरुआती दौर में इसमें 17 बस अड्डे शामिल हैं जिसमें लखनऊ के तीन बस अड्डे भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने प्रदेश के बस अड्डों को लेकर जारी टेंडर में साफ कर दिया है कि जो अब जो निवेशक इन बस अड्डों का निर्माण कराएंगे तो उनको यह 60 साल की लीज पर मिल जाएंगे। परिवहन निगम ने सोमवार को इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं।

इसके मुताबिक कौशांबी गाजियाबाद, कानपुर सेंटर झकरकटी, वाराणसी कैंट, सिविल लाइन इलाहाबाद, विभूतिखंड गोमतीनगर लखनऊ, बरेली सेटेलाइट, सोहराबगेट मेरठ, ट्रांसपोर्ट नगर आगरा, ईदगाह आगरा, आगरा फोर्ट, रसूलाबाद अलीगढ़, मथुरा ओल्ड, न्यू लैंड, गाजियाबाद, गोरखपुर, चारबाग लखनऊ, जीरो रोड प्रयागराज, अमौसी कार्यशाला लखनऊ, साहिबाबाद बस अड्डे शामिल हैं। सरकार ने पहले भी इस तरह कोशिशें की थी पर कोई निवेशक पैसा लगाने को तैयार नही था। ऐसे में सरकार ने शर्तों को आसान बना दिया है। अब निवेशकों को बस अड्डे बनाने के लिए दो साल का समय दिया गया है जबकि पहले यह समय डेढ़ साल था। वहीं अब निवेशकों को यह छूट भी मिल गयी है कि वह बस अड्डे के व्यवसायिक निर्माण को अब सात साल तक बनवा सकते हैं। पहले व्यवसायिक निर्माण के लिए पांच साल की मोहलत ही दी गई थी।

वहीं इस मुद्दे पर परिवहन निगम के जिम्मेदार अफसर अभी कुछ ज्यादा बोलने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि अभी सारी चीजें सामने नहीं आयी हैं। मंगलवार या बुधवार तक उम्मीद है कि इसकी पूरी प्रकिया सामने आ जाएगी। वैसे सूत्रों ने बताया कि कर्मचारी संगठन पहले भी बस अडडों के निजीकरण को लेकर नाराजगी जताते हुए सरकार को चेतावनी दे चुके हैं। वहीं इससे पहले बसपा सरकार में भी ऐसी कोशिशें हुयी थी पर विरोध के चलते यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। इसके बाद से लगातार निगम टेंडर निकाल करके बस अड्डों को बनाने की कोशिश कर रहा था। इस बार जारी टेंडर में शर्तों को और भी आसान कर दिया है।

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