समान नागरिक संहिता (Common civil code) लागू करने को लेकर बयानबाजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. भाजपा शासित कुछ राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर शुरू हुई कवायद शुरू कर दी है. इसी बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भी बयान जारी कर कहा है कि ‘यह ठीक कदम नहीं होगा. इसे देश के मुसलमान स्वीकार नहीं करेंगे.’ बता दें कि इस मामले में यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और शिक्षा मंत्री गुलाब देवी इसे लागू करने के पक्ष में अपने बयान दे चुके हैं. जानकारों की मानें तो इन बयानों के बड़े सियासी निहितार्थ हैं. माना जा रहा है 2024 की राजनीतिक बिशात अब बिछने लगी है, क्योंकि गृहमंत्री अमित शाह भी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर अपना बयान दे चुके हैं.
गृह मंत्री ने भी अपने बयान में किया था जिक्र
भोपाल में बीजेपी कार्यालय पर आयोजित एक बैठक में गृहमंत्री ने बयान दिया था, ‘सीएए, राम मंदिर, आर्टिकल 370 और ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों के फैसले हो गए हैं. अब बारी कॉमन सिविल कोड की है.’ शाह ने उत्तराखंड में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कॉमन सिविल कोड लागू किए जाने का भी जिक्र किया. यूपी की शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा था कि ‘प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी में कॉमन सिविल कोड लागू किए जाने का जल्द ही फैसला लेंगे.’
AIMPLB ने कहा यूनिफॉर्म सिविल कोड असंवैधानिक
अब लखनऊ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बयान जारी करते हुए कहा यूनिफॉर्म सिविल कोड असंवैधानिक है. पर्सनल लॉ बोर्ड यूनिफॉर्म सिविल कोड और अल्पसंख्यकों के खिलाफ है, जो मुसलमानों को मंजूर नहीं है. पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव डॉ. मोहम्मद वकारुद्दीन लतीफी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह ऐसा कोई कदम न उठाएं. उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म के मुताबिक जीवन जीने की अनुमति देता है. वहीं, उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता का मुद्दा केवल असल मुद्दों से ध्यान भटकाने और नफरत के एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए लाया जा रहा है. उनका कहा देश में महंगाई और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों का समाधान करने की बजाए केंद्र ने समान नागरिक संहिता का मुद्दा जुमले की तरह से उछाल दिया है.
इस मामले में यूपी की शिक्षा मंत्री ने दिया था बयान
यूपी की शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कॉमन सिविल कोड लागू करने को लेकर बयान दिया था. उन्होंने कहा कि ‘प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी की आवश्यकताएं और परिस्थितियों के बारे में जानते हैं. जिसके आधार पर वह यूपी में कॉमन सिविल कोड लागू किए जाने का जल्द ही फैसला लेंगे.’
डिप्टी सीएम ने कहा था स्टेट गवर्नमेंट यूनिफॉर्म सिविल कोड के पक्ष में
बता दें कि इस मामले में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि स्टेट गवर्नमेंट यूनिफॉर्म सिविल कोड के पक्ष में है, सभी को इसकी मांग करनी चाहिए और इसका स्वागत करना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये यूपी और देश के लोगों के लिए आवश्यक है और उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में सोच रही है. लोगों को इसकी मांग करनी चाहिए और इसका स्वागत करना चाहिए. उन्होंने बताया कि यह बीजेपी के अहम वादों में से एक है.
सिविल कोड के लिए जल्द बनेगी समिति: उत्तराखंड CM धामी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था “उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है जहां शांति कायम है और इसे संरक्षित किया जाना है. देवभूमि होने के अलावा, उत्तराखंड सैन्य भूमि भी है. समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा. उत्तराखंड में एक बार समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद, अन्य राज्यों को भी इसका पालन करना चाहिए. ताकि संदिग्ध शांति भंग करने में सफल न हों”.
दरअसल, 2019 के चुनावी घोषणापत्र में बीजेपी ने तमाम वादे किए थे. ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून, राम मंदिर, आर्टिकल 370 का खात्मा, नागरिकता संशोधन अधिनियम जैसे वादे 2019 के बाद पूरे किए गए. 2024 में अगले टेस्ट से पहले बाकी बचे वादों को पूरा करने की कवायद शुरू कर दी गई है. इनमें सबसे अहम है समान नागरिक संहिता ( Common Civil Code) है. जिसे लेकर अब लगातार बयान आ रहे हैं.
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