
मामला लालकुआं कोतवाली क्षेत्र का है, जहां अक्टूबर 2025 में एक युवती ने युवक पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं, इसके बावजूद वह पीड़िता के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था।
इस संवेदनशील मामले की विवेचना तत्कालीन जांच अधिकारी महिला एसआई द्वारा की जा रही थी। आरोप है कि विवेचना के दौरान न सिर्फ गंभीर लापरवाही बरती गई, बल्कि आरोपी को क्लीन चिट देने की कोशिश भी की गई। एसएसपी के संज्ञान में मामला आने पर महिला दरोगा को निलंबित कर दिया गया।
दरोगा के सस्पेंड होने के बाद पुलिस की आंतरिक जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी की पत्नी ने कोर्ट में बयान देते समय खुद को उसकी पत्नी न बताकर लिव-इन पार्टनर बताया था, ताकि यह साबित किया जा सके कि आरोपी शादीशुदा नहीं है। पुलिस जांच में जब आरोपी के वैवाहिक दस्तावेज और बच्चों के स्कूल रिकॉर्ड सामने आए, तो पत्नी की गवाही झूठी पाई गई।
एसएसपी मंजुनाथ टीसी ने स्पष्ट किया कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। आरोपी के बच्चों के स्कूल प्रमाणपत्रों में दर्ज पिता का नाम अहम साक्ष्य के रूप में कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, कोर्ट में झूठी गवाही देने वाली आरोपी की पत्नी के खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।