दूसरी बार — नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स कीर्तिमान प्रेम रावत जी के ना

3 लाख 75 हजार 603 लोगो ने सुना स्वयं को

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बोध गया बिहार में आए अंतर्राष्ट्रीय शांति वक्त श्री प्रेम रावत जी को लगभग पौने चार लाख लोगो ने बड़ी ही शांति पूर्वक सुना विशाल भीड को देखते हुए वहां उपस्थित एक एक व्यक्ति आने से लेकर जाने तक ना कोई धक्का मुक्की एक दम शांति ही शांति वहां छाई हुई थी—

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से आए खास महमानो ने प्रेम रावत जी को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से सम्मानित किया

*प्रेम रावत जी को 4 बार शांति दूत की उपाधि से सम्मानित किया गया है: यूनिपाज़ (ब्राजील में शांति विश्वविद्यालय) और तीन सरकारी संगठनों द्वारा।कई देशों ने अपने देश की चाबी देकर भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।*
उनका संदेश महज 4 वर्ष की बाल्या अवस्था से सुरु हुआ और आज तक जारी है।उनका संदेश है— जिस शांति की आपको तलास है वो आपके अंदर ही है बस जरूरत है उसे जानने की
*जैसे ही बोध गया बिहार की स्टेज पर प्रेम रावत जी आए पौने चार लाख तालियो की गूंज ने उनका स्वागत किया है* प्रेम रावत जी संदेश —

*तुम उन सब लोगो को जानते हो जो तुम्हारे आसपास है,*
*लेकिन क्या तुम अपने आप को भी जानते हो*

क्या तुम जानते हो कि तुम कौन हो?हो सकता है यह प्रश्न तुम्हे कुछ अजीब लगे लेकिन तुम्हारी असली कहानी तो तभी शुरू होगी जिस पल से तुम स्वयं यह महसूस करना शुरू करोगे कि तुम्हारे अंदर क्या घटित हो रहा है
अगर ये जीवन ही तुम्हारी कहानी है तो क्या तुम इस कहानी को और अधिक रोचक नही बनाना चाहेंगे?
कुछ लोग चाहते हैं कि उनके जीवन में रोमांच हो उनकी कहानि एक एडवेंचर बने।वे हिमालय पर चढ़ना चाहते हैं या कुछ ऐसा नया काम करना चाहते हैं जो उनसे पहले किसी दूसरे ने ना किया हो लेकिन सबसे रोमांचक जीवन में क्या है क्या क्या आप जानते है?सबसे बड़ा एडवेंचर है— अपने भीतर देखना और वास्तव में अपने आप को जानना यह जानना कि कोई आपके अंदर मौजूद हैं, जो हमेशा आपके साथ रहता है वह कभी नही बदलता भले ही तुम्हारा यह शरीर उम्र के साथ बदल जाए
जीवन की इस पूरी कहानी में तुम हमेशा खुद के साथ तो रहते हों लेकिन क्या कभी तुमने खुद के साथ सच्ची दोस्ती की है? क्या तुम सचमुच सुनना चाहोगे कि वास्तव में तुम चाहते क्या हो?कुछ तो है जिसे तुम्हारा ह्रदय हमेशा से चाहता है एक ऐसी इच्छा एक ऐसी प्यास एक ऐसी चाहत,जो हमेशा तुम्हारे भीतर बनी रहती है कभी तुमसे दूर नही होती।जब सचमुच इस प्यास को इस चाहत को तुम महसूस कर सको तो समझ लेना कि अब तुम अपनी कहानी खुद लिखने के लिए तैयार हो। प्रेम रावत जी