रामनगर: कोसी नदी क्षेत्र में फल-फूल रहे अवैध खनन के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए वन विभाग ने एक बड़ी और गोपनीय कार्रवाई को अंजाम दिया है। 9 फरवरी 2026 को चलाए गए इस विशेष अभियान ने खनन माफियाओं के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
🕵️ निजी वाहनों से पहुंचे बड़े अधिकारी; माफियाओं को भनक तक नहीं लगी
इस छापेमारी की सबसे खास बात इसकी गोपनीयता रही:
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नेतृत्व: डीएफओ रामनगर प्रकाश चंद्र आर्य (प्रभागीय तराई पश्चिमी वन प्रभाग) और एसडीओ किरण शाह ने खुद इस मोर्चे को संभाला।
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रणनीति: अधिकारियों ने अपनी सरकारी गाड़ियां छोड़कर निजी वाहनों का इस्तेमाल किया, ताकि नदी क्षेत्र में तैनात माफियाओं के ‘मुखबिरों’ को भनक न लग सके। इस अचानक हुई कार्रवाई से खनन में लगे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
🚜 बरामदगी: डंपर से लेकर ‘केकड़ा’ तक जब्त
सघन जांच अभियान के दौरान टीम ने बिना वैध दस्तावेजों के अवैध खनिज परिवहन कर रहे कुल 10 वाहनों को अपनी कस्टडी में लिया:
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8 डंपर: इनमें 6 डंपर (6 टायरा) और 2 बड़े डंपर (10 टायरा) शामिल हैं।
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1 ट्रैक्टर-ट्रॉली: अवैध खनन में प्रयुक्त।
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1 मोडिफाइड ट्रैक्टर (केकड़ा): जिसे खास तौर पर खनन के लिए बदला गया था।
इन सभी वाहनों को रेंज स्टाफ और एसओजी (SOG) टीम की निगरानी में नजदीकी वन चौकियों में खड़ा कर दिया गया है।
⚖️ कठोर वैधानिक कार्रवाई और भारी जुर्माना
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआत है:
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कानूनी प्रक्रिया: जब्त वाहनों के मालिकों और चालकों के खिलाफ वन अधिनियम व अन्य संबंधित कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
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जीरो टॉलरेंस: अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कोसी नदी की जैव विविधता और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी है।
📢 भविष्य की योजना: जारी रहेंगे औचक छापे
डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने कहा कि अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए इस तरह के गोपनीय और औचक अभियान भविष्य में भी नियमित रूप से जारी रहेंगे। विभाग की इस कार्रवाई से पूरे रामनगर और कोसी क्षेत्र के खनन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
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