
राजू अनेजा, काशीपुर।किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या की गूंज अब प्रदेश सरकार तक पहुंच चुकी है। इस दर्दनाक घटना के बाद न सिर्फ जिले बल्कि पूरे उत्तराखंड में जबरदस्त हलचल मच गई है। लंबे समय से गहरी नींद में सोया पुलिस प्रशासन अब हरकत में आ गया है और भू-माफियाओं, दलालों व संरक्षण देने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
पुलिस की कई टीमें नामजद आरोपियों की तलाश में जुटी हैं, वहीं एक विशेष टीम उन भू-माफियाओं की पहचान कर रही है, जिन्होंने मृतक किसान की जमीन की खरीद-फरोख्त कराई थी। इसके साथ ही काशीपुर क्षेत्र में ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है, जो जमीन की खरीद-बिक्री में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहे हैं।
मौत से पहले वीडियो, पुलिस अफसरों पर गंभीर आरोप
मृतक किसान सुखवंत सिंह ने बीते शनिवार को आत्महत्या से पहले एक वीडियो जारी कर पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। वीडियो सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आईटीआई थाना प्रभारी कुंदन सिंह रौतेला और एसआई प्रकाश बिष्ट को निलंबित कर दिया, जबकि पैगा चौकी की पूरी टीम को लाइन हाजिर कर दिया गया।
इस सख्त कार्रवाई के बाद पुलिस पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए एसआईटी का गठन कर संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
जमीन सौदों की परत-दर-परत जांच
पुलिस की एक अलग टीम काशीपुर से लेकर जसपुर तक उन लोगों की सूची तैयार कर रही है, जिन्होंने किसान की जमीन को खरीदने या बेचने में किसी भी स्तर पर भूमिका निभाई थी। इन सभी संदिग्धों को थाने बुलाकर पूछताछ की जा रही है। जमीन से जुड़े दस्तावेजों, रजिस्ट्रियों और लेन-देन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।
प्रॉपर्टी डीलरों का इतिहास खंगाल रही पुलिस
जिले में जमीन की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी के कई मामले पहले ही उजागर हो चुके हैं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते रहे हैं। अब पुलिस अपनी छवि पर लगे दाग धोने के लिए सख्त कदम उठा रही है। प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े लोगों का पूरा इतिहास खंगाला जा रहा है।
यह भी जांच की जा रही है कि इन लोगों ने जो संपत्तियां अर्जित की हैं, उनका वास्तविक स्रोत क्या है। माना जा रहा है कि इस जांच में कई ऐसे सफेदपोशों के नाम सामने आएंगे, जिनकी भूमिका अब तक पर्दे के पीछे रही।
सरकारी कर्मी भी रडार पर
किसानों की जमीनों पर अवैध कब्जे और फर्जी बिक्री के मामलों में सरकारी कर्मियों की संलिप्तता की आशंका भी पुलिस को नजर आ रही है। काशीपुर, जसपुर, बाजपुर सहित अन्य तहसीलों में ऐसे कर्मचारियों को चिन्हित किया जा रहा है, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
सूत्रों के अनुसार, यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो इन कार्मिकों पर भी बड़ी और कठोर कार्रवाई की तैयारी है।
एक सुखवंत नहीं, सिस्टम के शिकार हैं कई किसान
सुखवंत सिंह की आत्महत्या ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जिले में ऐसे कितने किसान हैं, जो भू-माफियाओं और दलालों के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम की सच्चाई है, जिसने किसानों को न्याय नहीं, बल्कि मजबूरी और मौत की ओर धकेला।
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