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यूजीसी नियमों पर हरदोई में राजनीतिक रार: ‘शिक्षा सुधार’ या ‘विभाजनकारी नीति’? जानें किसने क्या कहा

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर हरदोई के राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। यहाँ विभिन्न दलों के जिलाध्यक्षों के रुख का विश्लेषण दिया गया है:

🚩 भाजपा: “सोच-समझकर लिया गया बौद्धिक निर्णय”

भाजपा के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए इसे शिक्षा के हित में बताया।

  • तर्क: उन्होंने कहा कि यह निर्णय भाजपा के बुद्धिजीवियों ने सोच-समझकर लिया है।

  • विवाद से दूरी: उन्होंने विशिष्ट विवादित बिंदुओं पर सीधा कमेंट करने से बचते हुए कहा कि भाजपा हमेशा शिक्षा सुधार के पक्ष में रही है और इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी व गुणवत्तापूर्ण बनेगी।


🟢 सपा: “मुद्दों से ध्यान भटकाने और बांटने की राजनीति”

सपा जिलाध्यक्ष शराफत अली ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।

  • आरोप: भाजपा की नीति शुरू से ही बांटने की रही है। अब शिक्षा के क्षेत्र में भी छात्रों के बीच खाई पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • सोच: उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले लेती है ताकि देश गुमराह रहे और बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों की तरफ जनता की निगाह न जाए।


🔵 बसपा: “समाज को जोड़ने का होना चाहिए प्रयास”

बसपा जिलाध्यक्ष सूर्यकांत निराला ने सधे हुए शब्दों में अपनी बात रखी और सरकार को नसीहत दी।

  • तर्क: शिक्षा से जुड़े निर्णय ऐसे होने चाहिए जिससे सर्व समाज का हित हो।

  • नसीहत: नियमों में बदलाव करते समय सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखना अनिवार्य है। सरकार को समाज को बांटने के बजाय जोड़ने का काम करना चाहिए।


✋ कांग्रेस: “कुर्सी के लिए छात्रों को भी बांट रही भाजपा”

कांग्रेस जिलाध्यक्ष विक्रम पांडेय ने इसे ‘कुर्सी की राजनीति’ से प्रेरित बताया।

  • आरोप: यूजीसी के नियमों में बदलाव शिक्षा को समावेशी बनाने के बजाय विभाजन की ओर ले जा रहा है।

  • दावा: भाजपा सत्ता में बने रहने के लिए अब पढ़ाई करने वाले मासूम छात्रों को भी वर्गों में बांटने में लगी है, जिसकी कीमत आने वाली पीढ़ी को चुकानी पड़ेगी।


🏛️ सामाजिक संगठनों की मांग (प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति)

समिति के अध्यक्ष शिवम द्विवेदी ने स्पष्ट मांग की है कि केंद्र सरकार को इस कानून को तुरंत वापस लेना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा संस्थानों का मुख्य कार्य समरसता बढ़ाना है, न कि नए कानूनों के जरिए भेदभाव पैदा करना।

📋 राजनीतिक रुख एक नजर में:

पार्टी रुख मुख्य तर्क
भाजपा समर्थन शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता आएगी।
सपा विरोध छात्रों के बीच खाई पैदा करने का प्रयास।
कांग्रेस विरोध शिक्षा का राजनीतिकरण और छात्रों का विभाजन।
बसपा तटस्थ/नसीहत सर्व समाज का हित और संतुलन जरूरी।

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