
निवेशकों की रकम से सीईओ ने खरीदी निजी जमीन, खातों में मिले सिर्फ हजारों रुपये
राजू अनेजा,हल्द्वानी।शहर में फर्जी फाइनेंस कंपनियों का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। 25 माह में रकम दोगुनी करने का सपना दिखाकर जीएमएफएक्स ग्लोबल लिमिटेड नामक कंपनी ने करीब 8 हजार लोगों से 39 करोड़ रुपये की महाठगी कर डाली। निवेशकों की खून-पसीने की कमाई से कंपनी नहीं, बल्कि सीईओ ने अपने नाम पर जमीनें खरीद लीं, जबकि पीड़ित आज मूलधन के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
यह सनसनीखेज खुलासा शनिवार को कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की जनसुनवाई में हुआ। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर ने पहले सीईओ को तलब किया और फिर बिना समय गंवाए डहरिया स्थित सत्यलोक कॉलोनी में कंपनी के कार्यालय पर छापा मारा।
दस्तावेज शून्य, बैलेंस शीट गायब
पूछताछ में कंपनी के सीईओ बिमल रावत न तो बैलेंस शीट दिखा सके और न ही किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति। जांच में यह भी सामने आया कि जिन खातों में करोड़ों की रकम होनी चाहिए थी, उनमें एक खाते में सिर्फ 40 हजार और दूसरे में 50 हजार रुपये पाए गए।
कर्ज लेकर फंसे निवेशक, भरोसे का किया गया कत्ल
जांच में खुलासा हुआ कि कई निवेशकों ने कर्ज उठाकर 5 से 8 लाख रुपये तक कंपनी में लगाए थे। कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें नियमित वेतन तक नहीं दिया जाता था, केवल नए निवेशक जोड़ने पर इंसेंटिव थमाया जाता था। लोगों को गुमराह करने के लिए कंपनी ने वेबसाइट बना रखी थी, ताकि निवेश सुरक्षित होने का भ्रम बना रहे।
बेटी की शादी के पैसे भी डूबे
एक पीड़ित निवेशक ने रोते हुए बताया कि उसने बेटी की शादी के लिए जोड़े गए पांच लाख रुपये और रिश्तेदारों से उधार ली रकम कंपनी में लगा दी। कंपनी ने भरोसा दिलाया था कि 25 माह में पैसा दोगुना होगा, लेकिन अब न मुनाफा मिला और न ही मूलधन लौटाया जा रहा है।
निवेश से निजी संपत्ति, कर्मचारियों का भी शोषण
जांच में सामने आया कि कंपनी वर्ष 2023 में बनाई गई थी और शुरुआत से ही निवेशकों की रकम से हल्द्वानी के दो स्थानों पर सीईओ ने निजी भूमि खरीदी। कर्मचारियों को वेतन देने के बजाय केवल कमीशन पर काम कराया गया।
एफआईआर के निर्देश, सख्त धाराओं में मुकदमा तय
पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने मल्टी लेवल मार्केटिंग, पिरामिड स्कीम, कंपनी एक्ट के उल्लंघन और निवेश की राशि से निजी संपत्ति अर्जित करने के मामलों में कंपनी के सीईओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी पीड़ितों का पैसा लौटाने के आदेश भी दिए गए हैं।