चीन के तिआनजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में दुनियाभर की निगाहें टिकी हुई हैं। इस सम्मेलन को अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती देने और एक नए वैश्विक व्यवस्था का विकल्प बनने के रूप में देखा जा रहा है। इस मंच पर रूस, भारत और चीन (RIC) की एकजुटता को अमेरिका की नीतियों, खासकर टैरिफ की मनमानी को, झटका देने वाला माना जा रहा है।
RIC देशों की एकजुटता से ट्रंप की नीतियों को झटका
यह सम्मेलन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूस, भारत और चीन को अलग-थलग करने की कोशिशों को बड़ा झटका दे सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर ये तीनों देश एक साथ आते हैं, तो वे ग्लोबल मंच पर ट्रंप की मनमानी पर लगाम लगा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय चीन दौरे पर हैं और उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ करीब एक घंटे तक द्विपक्षीय बातचीत हुई है। इस दौरान सीमा विवाद, सीधी उड़ानें और व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
आंकड़ों में RIC बनाम अमेरिका
आबादी, अर्थव्यवस्था और व्यापार में RIC देश मिलकर अमेरिका पर भारी पड़ते हैं। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार:
- आबादी: RIC देशों की कुल आबादी अमेरिका से 9 गुना अधिक है, जो दुनिया की कुल आबादी का 31% है।
- अर्थव्यवस्था: वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार, PPP (परचेजिंग पावर पैरिटी) के मामले में RIC देशों की संयुक्त हिस्सेदारी $61.3 ट्रिलियन है, जो अमेरिका के $29.3 ट्रिलियन से दोगुनी से भी अधिक है।
- व्यापार: 2024 में RIC देशों का संयुक्त व्यापार $7.25 ट्रिलियन था, जबकि अमेरिका का व्यापार $4.99 ट्रिलियन रहा।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अगर रूस, भारत और चीन एक साथ खड़े होते हैं, तो वे वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी बन सकते हैं और अमेरिका की आर्थिक नीतियों को चुनौती दे सकते हैं।
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