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सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी पर फैसला: सवर्ण समाज ने मनाया जश्न, बताया “प्रथम जीत”

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हरदोई में यूजीसी (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के बाद स्थानीय संगठनों और सवर्ण समाज में उत्साह का माहौल है। प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति ने इस फैसले को सामाजिक एकजुटता की जीत करार दिया है।

इस घटनाक्रम की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

हरदोई: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादित नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को सवर्ण समाज ने एक बड़ी राहत के रूप में स्वीकार किया है। इस फैसले के बाद प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति ने आभार व्यक्त करते हुए इसे एकता का प्रतीक बताया है।

🤝 “हम सब हिंदू एक हैं” – एकता का संदेश

समिति के अध्यक्ष शिवम द्विवेदी ने कोर्ट के हस्तक्षेप का स्वागत करते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:

  • समानता की जीत: उन्होंने इस फैसले को समाज की “प्रथम जीत” बताया और कहा कि यह कदम सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए आवश्यक था।

  • खाई पाटने का प्रयास: द्विवेदी के अनुसार, “हम सब हिंदू एक हैं”, लेकिन ऐसे कानून समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास और खाई पैदा करने का काम करते हैं।

  • भविष्य की उम्मीद: समाज ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी ऐसे नियमों पर विचार किया जाएगा जो समावेशी हों और किसी एक वर्ग में असुरक्षा का भाव पैदा न करें।


📋 विवाद की पृष्ठभूमि और विरोध की वजह

यूजीसी के नियमों में बदलाव को लेकर विपक्षी दल (सपा, कांग्रेस) और कई सामाजिक संगठन पहले से ही मुखर थे। विरोध के मुख्य बिंदु ये थे:

  1. विभाजनकारी नीति: आलोचकों का मानना था कि नए नियम छात्रों को वर्गों में बांट रहे थे।

  2. समान अवसर: सवर्ण समाज और संगठनों की मांग थी कि शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और निष्पक्षता बनी रहनी चाहिए।

  3. राजनीतिक रंग: हरदोई में इस मुद्दे ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया था, जहाँ भाजपा इसे सुधार बता रही थी और विपक्ष इसे ‘कुर्सी की राजनीति’।


🏛️ सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का महत्व

अदालत के इस निर्णय से फिलहाल यूजीसी की नई नीतियों के क्रियान्वयन पर विराम लग गया है। इससे न केवल छात्रों के बीच व्याप्त असमंजस कम हुआ है, बल्कि उन संगठनों को भी बल मिला है जो लंबे समय से इसके खिलाफ आवाज उठा रहे थे।

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