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रासायनिक नमूना प्रसंस्करण एवं विश्लेषण के लिए विकसित अभिनव उपकरण का डिजाइन पंजीकृत: भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से मिला डिजाइन रजिस्ट्रेशन

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देहरादून। रासायनिक नमूना प्रसंस्करण, निगरानी और विश्लेषणात्मक प्रयोगशाला कार्यों को अधिक सुव्यवस्थित, सुविधाजनक तथा प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा विकसित “Apparatus for Chemical Sample Processing, Monitoring and Analytical Laboratory Applications” शीर्षक वाले नवाचारी उपकरण का भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा Design Registration No. 504592-001 के रूप में सफल पंजीकरण किया गया है।
जून 2026 में पंजीकृत हुआ डिजाइन, Class 24-01 के तहत मिला प्रमाण-पत्र
बौद्धिक संपदा कार्यालय (भारत सरकार) द्वारा जारी आधिकारिक प्रमाण-पत्र के अनुसार, इस डिजाइन का पंजीकरण 04 जून 2026 को स्वीकृत हुआ और इसका प्रमाण-पत्र 05 अगस्त 2026 को जारी किया गया। इस उपकरण को Class 24-01 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है। उपकरण में कॉम्पैक्ट एवं इंटीग्रेटेड हाउसिंग, फ्रंट कंट्रोल एवं डिस्प्ले इंटरफेस, सैंपल-प्रोसेसिंग चैंबर और मूवेबल कवर जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो प्रयोगशालाओं में विभिन्न प्रक्रियाओं के सटीक संचालन और मापदंडों की निगरानी को बेहद आसान बनाती हैं।
फार्मा, गुणवत्ता नियंत्रण और शोध प्रयोगशालाओं को मिलेगा बड़ा लाभ
यह अभिनव उपकरण प्रयोगशालाओं में मैनुअल हस्तक्षेप को कम करने, कार्यों में एकरूपता लाने और कार्यप्रवाह को सुगम बनाने में अत्यंत मददगार साबित होगा। इसका बहुआयामी उपयोग रासायनिक एवं विश्लेषणात्मक प्रयोगशालाओं के अलावा फार्मास्यूटिकल, शोध एवं विकास (R&D), गुणवत्ता नियंत्रण, पर्यावरण, खाद्य एवं पेय पदार्थ, औद्योगिक तथा शैक्षणिक संस्थानों में किया जा सकेगा। स्वदेशी प्रयोगशाला तकनीक के इस विकास को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इन शोधकर्ताओं के नाम दर्ज हुआ पेटेंट, डॉ. आशीष उपाध्याय ने दी बधाई
इस ऐतिहासिक डिजाइन का पंजीकरण डॉ. निर्मला सिसोदिया, डॉ. प्रियंका सैनी, डॉ. प्रियंका त्यागी, डॉ. रंजना शाह, डॉ. मुरली मनोहर तिवारी, प्रो. प्रशांत सिंह, डॉ. सुनीता उपाध्याय, डॉ. मनीन्द्र मोहन तथा डॉ. ममता बेलवाल के संयुक्त नाम दर्ज हुआ है। इस शानदार सफलता पर डॉ. आशीष कुमार उपाध्याय ने पूरी शोध टीम को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि सामूहिक प्रयास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निरंतर परिश्रम का सुखद परिणाम है।
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