हिमालय प्रहरी

बाघ ने बच्चे पर हमला कर ली जान, अंतिम संस्कार में पहुंचे दादा को भी उसी बाघ में बना लिया निवाला, सदमे से बुजुर्ग महिला ने भी तोड़ा दम

खबर शेयर करें -

एक ही टाइगर ने पोते और दादा को मार डाला, पोते के अंतिम संस्कार में गए दादा को भी खा लिया।

कर्नाटक के एक फॉरेस्ट रिजर्व इलाके में बहुत ही दर्दनाक घटना सामने आई है। पहले एक आदमखोर बाघ ने 10 साल के बच्चे पर हमला करके उसकी जान ले ली। कुछ ही घंटे के भीतर पोते के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे उसके बुजुर्ग दादा को भी उसी आदमखोर बाघ ने मार डारा और उसके शव को घसीटते हुए जंगलों में चला गया।

इन दो-दो सदमे को परिवार की एक बुजुर्ग महिला बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसने भी दम तोड़ दिया। ऐसी दुखद घटना के बारे में सुनकर हर कोई सन्न रह गया है। मामला विधानसभा तक में गूंजा है और वन विभाग के लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

एक आदमखोर बाघ ने कर्नाटक के कोडागु जिले में हड़कंप मचा दिया है। कुछ ही घंटे के अंदर उस आदमखोर बाघ ने 10 साल के लड़के और 75 साल के उसके दोनों दादा को मार डाला है। वन विभाग के लोग उस आदमखोर को पकड़ने के लिए अभियान शुरू कर चुके हैं, लेकिन अभी तक वह बाघ हाथ नहीं आया है। जबसे बाघ के हमले की जानकारी सामने आई है, लोगों ने दहशत के मारे इधर-उधर निकलना कम कर दिया है। घटना बहुत ही दर्दनाक है। पूरे इलाके में लोग डरे-सहमे हुए हैं।

बाघ ने पहले 10 साल के चेतन नाम के लड़के पर हमला किया था। घटना बड़गा पंचायत के तहत आने वाले कुट्टा गांव की है। यहां चेतन के परिवार वाले एक फार्म हाउस में काम करने के लिए आए हुए थे। वैसे वे लोग मूलरूप से मैसूरु जिले के हुनसुर इलाके के पंचावल्ली गांव के रहने वाले हैं। हुआ ये कि रविवार शाम के समय चेतन उस फार्म हाउस के पास ही खेल रहा था। तभी बाघ ने उसपर हमला कर दिया और उसे बुरी तरह से जख्मी कर दिया था। आखिरकार चेतन को नहीं बचाया जा सका।

सोमवार सुबह में उसी बाघ ने चेतन के दादा राजू पर भी हमला कर दिया। वह अपने पोते के अंतिम संस्कार में भाग लेने पहुंचे थे। बाघ ने उनके सिर को खा लिया और शव को घसीटते हुए जंगल में ले गया। दादा-पोते की इस दर्दनाक मौत की गूंज विधानसभा में भी सुनाई दी। स्थानीय भाजपा विधायक केजी बोपैया ने कहा कि बाघ ने रविवार शाम को लड़के और सोमवार सुबह उसके दादा को खा लिया। उन्होंने घटना के लिए वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि वह गांव नागरहोल रिजर्व फॉरेस्ट इलाके में आता है। उन्होंने स्थानीय डीएफओ को सस्पेंड करने की मांग की। उनका आरोप है कि रविवार को ही बाघ के हमले की सूचना दे दी गई थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई ऐक्शन नहीं लिया।

भाजपा विधायक बहुत ही नाराज लग रहे थे और उन्होंने इन घटनाओं के लिए सीधे तौर पर वन विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। यही नहीं उन्होंने सरकार से भी कहा कि अगर बाध को कंट्रोल कर सकते हैं तो कीजिए। नहीं तो हम पर छोड़ दीजिए हम इस समस्या से निपट लेंगे। दूसरे सत्ताधारी विधायक ने भी इस घटना के लिए वन विभाग और उसके अधिकारियों पर उंगली उठाई और स्थानीय वन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

वहीं काग्रेस विधायक एचपी मंजूनाथ ने बताया कि बाघ के हमले में मारे गए दोनों दादा-पोते हुनसूर तालुक के रहने वाले थे और मजदूरी के लिए वहां गए हुए थे। दादा, पोते के अंतिम संस्कार में पहुंचा और वह भी मारा गया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बारे में सुनकर उनके परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला की भी मौत हो गई। उन्होंने सत्ताधारी विधायकों को भी लपेटने की कोशिश की और साथ ही साथ वन अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की।

Exit mobile version