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ऑनलाइन गेम खेलने वाले यूजर्स को जरूरी हो सकता है केवाईसी, आपके हर ट्रांजैक्शन पर सरकार अब रखेगी नजर

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ऑनलाइन गेम खेलने वालों पर सरकार सख्ती बढ़ा सकती है। सरकार को ऑनलाइन गेम्स में बड़ा खेल नजर आ रहा है क्योंकि इस तरह खेलों में पैसे का इस्तेमाल होने लगा है। दरअसल, सरकार को इस बात का अंदेशा है कि ऑनलाइन गेमिंग में लगने वाला पैसा काला धन हो सकता है। ऐसे गेम जिनमें पैसों का इस्तेमाल होता है उसके जरिए काले धन को सफेद बनाने का काम चल रहा है। सरकार ऑनलाइन गेम्स को मनीलॉन्डरिंग एक्ट (Prevention of Money Laundering Act – PMLA) के तहत लाने का प्रयास कर रही है। अगर ऐसा होता है तो ऑनलाइन गेम्स खेलने वाले यूजर्स को KYC करानी होगी।

 

ऑनलाइन गेम खेलने वाले यूजर्स को करानी होगी KYC

यदि ऑनलाइन गेमिंग की सुविधा देने वाले प्लेटफॉर्म को PMLA के दायरे में लाया जाता है, तो ऐसी कंपनियों के ग्राहकों को केवाईसी के नियमों का पालन करना होगा। बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक सरकार ऑनलाइन गेमिंग और इससे जुड़ी सर्विस को PMLA के तहत लाना चाहती है। सरकार को इस तरह के कदम की जरूरत तब पैदा हुई जब जांच एजेंसियां ​​कुछ पैसे के लेन-देन को ट्रैक करने में नाकाम रही।

पैसा ट्रैक करने में आई परेशानी

 

गेमिंग कंपनियों को मनीलॉन्डरिंग एक्ट में लाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि ऑनलाइन गेम प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाली ट्रांजेक्शन को जांच एजेंसियां ट्रैक नहीं कर पाई। इसका बड़ा कारण था कि ऑनलाइन गेमिंग में पैसा लगा रहे ग्राहकों की कोई भी जानकारी नहीं थी। यूजर्स की कोई भी आधिकारिक जानकारी या पहचान पत्र नहीं था, जिसके कारण ग्राहकों की KYC की जरूरत महसूस हो रही है। गेमिंग एप्लिकेशन पर लाखों रुपये की हेराफेरी हुई और इससे जुड़े हुए लोगों की जानकारी नहीं मिली। सरकार को अंदेशा है कि इस रकम का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए भी हो सकता है।

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