कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इन दिनों अपना दर्द-ए-दिल सोशल मीडिया के जरिए बंया कर रहे हैं. 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें जो करारी हार का सामना करना पड़ा है, उसकी वजह से हरदा इन दिनों काफी परेशान नजर आ रहे हैं. हरीश रावत ने खुद इस बात का जिक्र किया है कि चुनाव में सर्वाधिक दंड उन्हें ही भुगतना पड़ता है.
हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर जो पोस्ट की उसमें लिखा कि उनके मन में यही चल रहा है कि वे पहले अपने गांव मोहनरी जाएं या फिर मां गंगा के किनारे हरिद्वार में जाकर 10 दिनों तक एक कुटिया में प्रवास करें. हरीश रावत ने आगे लिखा कि वो मां गंगा के जल से भगवान दक्षेश्वर का जलाभिषेक कर अपनी उन गलतियों के लिए क्षमा मांगेंगे, जिनके कारण हर चुनाव में सर्वाधिक दंड उन्हें ही भुगतना पड़ता है
हरीश रावत ने कहा कि कितना अजीब है कि उन्होंने पूरी पार्टी के लिए उत्तराखंडियत का एक कवच तैयार किया, जिसे बीजेपी भेद नहीं पाई है. प्रधानमंत्री को खुद टोपी पहनकर उत्तराखंडियत के महत्व को स्वीकारना पड़ा, फिर भी वे उत्तराखंडियत के मायके लालकुआं में बुरी तरीके से पराजित हो गए. हरीश रावत ने अपना दर्द बंया करते हुए कहा कि लालकुआं में ऐसा लग रहा था कि जैसे चुनकर के बूथ दर बूथ उन्हें दंडित करने का जनता इंतजार कर रही थी. हालांकि, जीत-हार होती है, मगर विचार की हार नहीं होनी चाहिए.
हरीश रावत ने कहा कि उनका मानना है कि जो विचार 2014 में उन्होंने आगे बढ़ाएं, वही विचार उत्तराखंड में पलायन, बेरोजगारी, गरीबी और खाली होते गांवों की जिंदगी आदि का समाधान है. उन्हें कोई भी हरिद्वार, उधमसिंह नगर और सीमांता जिलों के लिए ऐसा नया विचार लेकर आगे बढ़ता हुआ नहीं दिख रहा है, जिसके आधार पर वे कह सकें कि उत्तराखंड इस पर बढ़ते हुए अपनी चुनौतियों का समाधान निकालेगा.
हरीश रावत ने कहा कि वे तो मां गंगा और भगवास शिव से यह प्रार्थना जरूर करेंगे कि भगवन आप गंगा के जल से जलाभिषेशित होकर जरा मार्गदर्शन करिए, कहीं जिन बातों को मैं कह रहा हूं, उनसे इतर तो कुछ समाधान उत्तराखंड की समस्याओं का नहीं है. शरीर भी कमजोर हो रहा है. चाहता हूं 8-10 दिन हनुमान जी की मूर्ति के सामने मैं हनुमान चालीसा का पाठ भी पढ़ूं.
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