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उत्तराखंड में ‘डबल पेंशन’ का महाघोटाला: 1,377 सरकारी पेंशनर्स ले रहे थे समाज कल्याण की भी पेंशन; CAG ने पकड़ा फर्जीवाड़ा

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देहरादून: उत्तराखंड में वित्तीय अनियमितता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य के 1,377 रिटायर सरकारी कर्मचारी नियम विरुद्ध तरीके से दोहरी पेंशन का लाभ उठा रहे थे। ये कर्मचारी अपनी नियमित सेवा पेंशन के साथ-साथ समाज कल्याण विभाग द्वारा दी जाने वाली वृद्धावस्था और विधवा पेंशन भी डकार रहे थे।

📊 CAG ने ऐसे पकड़ी चोरी

CAG ने अत्याधुनिक डेटा विश्लेषण और आधार कार्ड के जरिए क्रॉस-वेरिफिकेशन किया।

  • डेटा मिलान: सरकारी पेंशन डेटाबेस और समाज कल्याण विभाग के लाभार्थियों के डेटा का मिलान करने पर 1,377 नाम उभयनिष्ठ (Common) पाए गए।

  • नियम: सरकारी नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सेवानिवृत्ति पेंशन का पात्र है, तो वह सामाजिक सुरक्षा पेंशन (जैसे वृद्धावस्था पेंशन) का लाभ नहीं ले सकता।


📋 जांच में चौंकाने वाले तथ्य

समाज कल्याण निदेशालय की प्रारंभिक जांच में कई गंभीर बातें सामने आई हैं:

  • एक्टिव मामले: कुल 1,377 मामलों में से 970 मामले वर्तमान में एक्टिव पाए गए हैं।

  • फिजिकल वेरिफिकेशन: भौतिक सत्यापन के बाद 314 लोगों को सूची से हटा दिया गया है।

  • मृतक लाभार्थी: जांच में 93 ऐसे पेंशनर्स भी मिले जो मर चुके हैं, फिर भी उनके नाम पर पेंशन जारी हो रही थी।

  • स्वतंत्रता सेनानी कोड: डेटा की गहराई से जांच करने पर 565 लोग ऐसे मिले जो स्वतंत्रता सेनानी पेंशन की श्रेणी में भी लाभ ले रहे हैं।


⚖️ सरकार और प्रशासन का सख्त रुख

CAG ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और वित्त विभाग को पत्र भेजा है।

  • डेडलाइन: CAG ने इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर मांगी है।

  • वसूली की तैयारी: समाज कल्याण निदेशालय के अधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि जिलाधिकारियों (DM) और अपर जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन तमाम पेंशनर्स की भौतिक जांच कर रिपोर्ट दें, ताकि शासन के निर्देशानुसार वसूली और कानूनी कार्रवाई की जा सके।


📌 मुख्य विवरण

विवरण संख्या
कुल संदिग्ध मामले 1,377
सक्रिय पेंशनर्स 970
जांच में हटाए गए 314
मृतक पाए गए 93
स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी में संदिग्ध 565

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