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क्या हरदा से डरकर बंद करवाया ओवरब्रिज? पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने छोड़ा सियासी तीर – मेरी यात्रा से घबरा रही है सरकार?’

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राजू अनेजा, काशीपुर।काशीपुर में बाजपुर रोड स्थित आरओबी के चार से आठ अक्टूबर तक बंद रहने का मामला अब महज यातायात व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आरओबी पर यातायात प्रतिबंध को अपनी जनसंवाद यात्रा से जोड़ते हुए ऐसा राजनीतिक तंज कसा है, जिसने इस पूरे मामले को सियासी रंग दे दिया है।

सवाल सीधे सरकार की ओर उछाला गया है—क्या हरीश रावत की यात्रा से घबराकर आरओबी बंद कराया गया?

हालांकि आरओबी पर यातायात प्रतिबंध का आधिकारिक कारण एक्सटेंशन ज्वाइंट की मरम्मत बताया गया है, लेकिन काशीपुर पहुंचने पर हरीश रावत ने इसी बंदी को अपनी यात्रा के संदर्भ में उठाते हुए सरकार पर तीखा कटाक्ष किया।

‘इस बार आरओबी खराब किया है, अगली बार घबराकर कहीं तोड़ न दें’

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आरओबी बंद होने पर तंज कसते हुए कहा कि इस बार आरओबी खराब किया है, अगली बार घबराकर कहीं इसे तोड़ ही न दें।

हरदा के इस बयान ने सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़ा कर दिया। उनका इशारा साफ तौर पर इस ओर था कि उनकी जनसंवाद यात्रा के रास्ते में जिस समय आरओबी बंद किया गया, उसे लेकर राजनीतिक सवाल उठना स्वाभाविक है।

आरओबी की मरम्मत वास्तविक कारण है या यात्रा के समय बंदी को लेकर राजनीतिक असहजता—इस पर प्रशासन की ओर से क्या स्पष्टीकरण आता है, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा।

‘मेरी यात्रा से घबरा रही है सरकार?’—हरदा ने छोड़ा सियासी तीर

 

हरीश रावत ने आरोप लगाने के अंदाज में कहा कि उनकी यात्रा से धामी सरकार घबरा रही है। इसी क्रम में उन्होंने आरओबी बंद किए जाने और यात्रा मार्ग में निर्माण कार्य शुरू होने का जिक्र किया।

हरदा के बयान ने काशीपुर की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। क्योंकि एक तरफ सरकारी स्तर पर आरओबी की मरम्मत को यातायात सुरक्षा और तकनीकी कार्य से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री इसे अपनी राजनीतिक यात्रा के संदर्भ में देख रहे हैं।

यही विरोधाभास अब इस पूरे घटनाक्रम को चर्चा का विषय बना रहा है।

चार से आठ अक्टूबर तक बंद है आरओबी, ठीक इसी दौरान पहुंची हरदा की यात्रा

बाजपुर रोड स्थित आरओबी के एक्सटेंशन ज्वाइंट की मरम्मत के चलते चार से आठ अक्टूबर तक आरओबी पर यातायात प्रतिबंधित किया गया है। संयोग यह है कि इसी दौरान हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा काशीपुर से होकर गुजरी।

यही टाइमिंग हरदा के राजनीतिक तंज का आधार बनी।

उन्होंने यात्रा मार्ग में अवरोधों का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की व्यवस्थाओं से वह और कांग्रेस कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं।

‘अगली बार चुपके से आएंगे’—प्रशासन को हरदा की चेतावनी

हरीश रावत ने कहा कि अगली बार वह राज्य सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन को अपने कार्यक्रम की जानकारी नहीं देंगे और चुपके से आएंगे।

उनका यह बयान भी राजनीतिक तौर पर खासा चर्चित रहा। एक वरिष्ठ नेता का यात्रा से पहले प्रशासन को सूचना न देने की बात कहना सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।

हरदा के मुताबिक, यदि उनकी यात्रा के रास्ते में इस तरह की व्यवस्थाएं की जाती हैं तो अगली बार वह बिना पूर्व सूचना के जनता के बीच पहुंचेंगे।

आरओबी की मरम्मत या राजनीतिक रास्ते में ‘रोड़ा’?

यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल बन गया है।

सरकार का पक्ष: आरओबी के एक्सटेंशन ज्वाइंट की मरम्मत जरूरी है, इसलिए चार से आठ अक्टूबर तक यातायात प्रतिबंधित किया गया।

हरदा का सवाल: यात्रा के दौरान ही आरओबी बंद क्यों हुआ और यात्रा मार्ग में निर्माण कार्य क्यों शुरू हुआ?

दोनों बातों के बीच का अंतर ही अब काशीपुर में सियासी चर्चा का मुद्दा बन गया है।

हरीश रावत ने इसे महज तकनीकी मरम्मत के रूप में नहीं देखा, बल्कि अपनी यात्रा के संदर्भ में सरकार पर राजनीतिक कटाक्ष किया। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन इस पर क्या स्पष्टीकरण देता है।

हरदा की यात्रा और आरओबी बंदी—काशीपुर में सियासी संयोग ने बढ़ाई गर्मी

हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा पहले ही कांग्रेस के अंदर चर्चा में है। पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने यात्रा को लेकर आपत्ति जताई थी और संगठन के साथ समन्वय का सवाल उठाया था। इसके बावजूद रावत ने यात्रा जारी रखी।

ऐसे राजनीतिक माहौल में काशीपुर का आरओबी बंद मिलना और उसके बाद हरदा द्वारा इस पर सवाल उठाना मामले को और दिलचस्प बना गया है।

अब सवाल आरओबी की मरम्मत से आगे बढ़कर राजनीतिक हो गया है—क्या यह महज एक तकनीकी काम था, या हरदा की यात्रा के समय बंदी ने अनजाने में एक बड़ा सियासी मुद्दा पैदा कर दिया?

इसका जवाब सरकार और प्रशासन के स्पष्टीकरण से ही साफ होगा। फिलहाल हरदा का तंज काशीपुर की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

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