हल्दूचौड़ – 22 जंगी बंगर जिला पंचायत सदस्य सीट पर होने वाले उपचुनाव में मुकाबला कहीं ना कहीं रोमांचित होता जाता प्रतीत हो रहा है। जहां एक तरफ जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रहे समाजसेवी कमलेश चंदोला को क्षेत्र के हर वर्ग से भारी समर्थन मिलता हुआ दिख रहा है वही इनके विपक्ष में लड़ रहे बाकी प्रत्याशी भी अपनी एड़ी चोटी का दम लगाते हुए नजर आ रहे हैं।
कमलेश चंदोला वह उनके विपक्ष में लड़ रहे प्रत्याशी की भाजपा पृष्ठभूमि होने की वजह से भाजपा भी दो खेमों में बटी हुई नजर आ रही है।
बताते चलें कि जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है वही समाजसेवी कमलेश चंदोला के साथ क्षेत्र के हर वर्ग का समर्थन बढ़ते ही जा रहा है, जहां युवाओं में उनके प्रति भारी जोश दिख रहा है, वहीं महिलाओं ओर बुजुर्गों में भी उनके द्वारा लगातार किए गए समाज सेवा के काम के कारण उनके प्रति झुकाव बढ़ता दिख रहा है। तो चलिए जानते हैं उन कारणों को जिस कारण वह अपने प्रतिद्वंद्वियों से कहीं आगे बढ़ते दिख रहे हैं।
उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के अन्तर्गत लालकुआं विधानसभा क्षेत्र हल्दूचौड़ निवासी वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश चंदोला द्वारा पिछले लंबे समय से गरीब-असहाय जनों की निस्वार्थ मदद के चलते क्षेत्र में समाजसेवी की पहचान पहले ही बना चुके हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और समाजसेवी कमलेश चंदोला पिछले कई सालों से क्षेत्र की जनता के बीच पहुंच उनके सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं, लगातार जनता से जुड़े समस्याओं को लेकर सरकार को भी अवगत करा समस्याओं का निदान कराने का काम करते रहें है।
बता दें कि आपदा काल में जरूरतमंदो की जिस सेवा भाव से वह मदद कर रहे थे उसकी आज भी चौतरफा प्रशंसा होति है। इस सेवा के चलते ही गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रवि किशन शुक्ला ने कोरोना योद्धा सर्टिफिकेट देकर उन्हें सम्मानित किया था।
गौरतलब हो कि लॉकडाउन के समय हल्दूचौड़, बरेली रोड़, लालकुआं, बिंदुखत्ता, गौलापार व चोरगलिया क्षेत्र में जाकर जरूरतमंदों को राशन व जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराने पर टीम मोदी सर्पोटर संघ ने क्षेत्र के समाजसेवी कमलेश चंदोला को कर्मवीर योद्धा के सम्मान से भी नवाजा गया था।
इस के अलावा पिछले कई वर्षों से वह हाड़ कपाती सर्दी के सीजन में नियमित रूप से गरीब बेघर लोगों को कंबल और रजाई का वितरण करते हैं। सर्दी का सीजन शुरू होते ही वह हर वर्ष कंप कपाती सर्दी के बीच रातों को रेलवे स्टेशन ,बस अड्डा समेत झुग्गी बस्तियों को निकल पड़ते हैं और जो भी असहाय गरीब मिलता है उसे कंबल और रजाई ओढ़ाकर ठंड से बचाने का प्रयास करते हैं।
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