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जाम से छुटकारे के लिए बाजपुर रोड पर आरओबी बना, अब चीमा चौराहे को अंडरपास की सौगात कब?

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जाम से जूझते काशीपुर के प्रमुख चौराहे को यातायात सुधार की दरकार, मास्टर प्लान में भी चौराहों के सुधार पर जोर; अंडरपास की व्यवहार्यता पर उठे सवाल

राजू अनेजा, काशीपुर।काशीपुर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बाजपुर रोड पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण हो चुका है, लेकिन शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात दबाव को लेकर सवाल अब भी महत्वपूर्ण हैं। चीमा चौराहा भी ऐसा ही एक स्थान है, जहां यातायात व्यवस्था को लेकर ठोस और दीर्घकालिक समाधान की जरूरत पर चर्चा होनी चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है कि बाजपुर रोड पर आरओबी बनने के बाद क्या चीमा चौराहे की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए भी कोई व्यापक योजना बनाई जाएगी? क्या यहां अंडरपास की संभावना का तकनीकी अध्ययन कराया जा सकता है?

यह सवाल किसी एक निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर की बढ़ती जरूरतों, आम लोगों की आवाजाही और भविष्य की यातायात व्यवस्था से जुड़ा है।

आरओबी बना, अब चौराहों की समस्या पर भी हो मंथन

बाजपुर रोड काशीपुर के प्रमुख मार्गों में शामिल है। इस मार्ग पर रेलवे क्रॉसिंग के कारण होने वाली बाधा को दूर करने के उद्देश्य से आरओबी बनाया गया। हालांकि, किसी प्रमुख मार्ग पर ओवरब्रिज का निर्माण होने का अर्थ यह नहीं कि आसपास के सभी चौराहों की यातायात संबंधी समस्याएं भी स्वतः समाप्त हो जाएंगी।

शहर में यातायात सुचारु रखने के लिए जरूरी है कि प्रमुख मार्गों के साथ उनसे जुड़ने वाले चौराहों, कटों और संपर्क सड़कों की स्थिति का भी आकलन किया जाए। वाहनों का दबाव कहां अधिक है, किस समय जाम की स्थिति बनती है और किन कारणों से आवागमन प्रभावित होता है—इन सवालों के जवाब व्यवस्थित यातायात सर्वेक्षण से ही मिल सकते हैं।

इसी आधार पर तय किया जा सकता है कि किसी स्थान पर अंडरपास उपयोगी होगा, फ्लाईओवर की जरूरत है, चौराहे का पुनर्गठन करना उचित रहेगा या यातायात प्रबंधन में बदलाव से समस्या का समाधान हो सकता है।

मास्टर प्लान में भी चौराहों के सुधार पर जोर

काशीपुर के मास्टर प्लान-2041 के उपलब्ध दस्तावेज में चीमा चौराहे सहित शहर के कई प्रमुख चौराहों के सुधार की जरूरत का उल्लेख है। दस्तावेज में चीमा चौराहे के जंक्शन सुधार को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर किए जाने की आवश्यकता बताई गई है। इससे स्पष्ट होता है कि शहर की नियोजन संबंधी चर्चा में प्रमुख चौराहों की यातायात व्यवस्था एक महत्वपूर्ण विषय रही है। <Link url=”https://ddausn.org.in/wp-content/uploads/2023/03/Kashipur-Master-PlanFINAL-SUBMITTED-.pdf” title=”काशीपुर मास्टर प्लान-2041 का दस्तावेज देखें।”/>

ऐसे में सवाल है कि चीमा चौराहे की मौजूदा यातायात स्थिति का आकलन किस स्तर पर हुआ है? क्या जंक्शन सुधार के प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई की गई है? यदि कोई योजना तैयार है, तो उसकी स्थिति और समयसीमा जनता के सामने रखी जानी चाहिए।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना भी जरूरी है। मास्टर प्लान में चौराहे के सुधार का उल्लेख अपने आप में अंडरपास निर्माण की स्वीकृति नहीं है। अंडरपास के लिए अलग से तकनीकी व्यवहार्यता, लागत, भूमि और अन्य जरूरी पहलुओं की जांच आवश्यक होगी।

अंडरपास ही समाधान है या किसी दूसरे विकल्प की जरूरत?

चीमा चौराहे पर अंडरपास की संभावना पर विचार करना जनहित से जुड़ा सवाल हो सकता है, लेकिन इसका फैसला अनुमान के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित विभागों को यातायात का सर्वेक्षण कराना होगा और यह देखना होगा कि अंडरपास बनाने से वाहनों की आवाजाही वास्तव में बेहतर होगी या नहीं।

सड़क की चौड़ाई, आसपास के निर्माण, भूमि की उपलब्धता, जल निकासी, भूमिगत सेवाओं, निर्माण लागत और यातायात के संभावित बदलावों को ध्यान में रखना होगा। यदि अंडरपास तकनीकी रूप से उपयुक्त नहीं पाया जाता, तो दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

जनता की अपेक्षा यही है कि समस्या का समाधान केवल अस्थायी यातायात नियंत्रण तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसा विकल्प चुना जाए जो लंबे समय तक उपयोगी साबित हो।

जाम से राहत की योजना में जवाबदेही भी जरूरी

शहर के यातायात सुधार की योजना बनाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसकी प्रगति की जानकारी सार्वजनिक करना। चीमा चौराहे पर यातायात का दबाव कितना है, वहां किस तरह के सुधार की जरूरत है और संबंधित विभागों ने अब तक क्या आकलन किया है—इन सवालों पर स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

प्रशासन, यातायात पुलिस, लोक निर्माण विभाग और नगर नियोजन से जुड़े अधिकारियों के बीच समन्वय से समस्या की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। यदि सर्वेक्षण की जरूरत है, तो उसे कराया जाए; यदि योजना बन चुकी है, तो उसकी स्थिति बताई जाए; और यदि अंडरपास संभव नहीं है, तो वैकल्पिक समाधान का खाका सामने रखा जाए।

आखिरकार, यातायात सुधार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूरा करना नहीं, बल्कि लोगों के सफर को सुरक्षित, सुगम और कम परेशानी वाला बनाना है।

जनता का सवाल—चीमा चौराहे की बारी कब आएगी?

बाजपुर रोड पर आरओबी बनने के बाद चीमा चौराहे की यातायात व्यवस्था को लेकर भी योजनाबद्ध पहल की अपेक्षा की जा रही है। शहरवासियों के हित में यह जरूरी है कि संबंधित विभाग चौराहे की स्थिति का आकलन कराएं और अंडरपास सहित सभी व्यावहारिक विकल्पों पर विचार करें।

अब सवाल यह है कि चीमा चौराहे के सुधार के लिए कोई ठोस कार्ययोजना कब सामने आएगी? क्या यहां अंडरपास की संभावना का तकनीकी अध्ययन कराया जाएगा, या यातायात दबाव कम करने के लिए कोई दूसरा विकल्प चुना जाएगा?

काशीपुर को जरूरत केवल नए निर्माण की नहीं, बल्कि ऐसी यातायात योजना की है जो शहर की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनका स्थायी समाधान तलाशे। चीमा चौराहे को लेकर भी अब स्थिति स्पष्ट करने और जनहित में ठोस पहल करने का समय है।

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