प्रदेश में निकाय व पंचायती चुनाव की तैयारियां होने लगी है। ऐसे में पिछले कई दशकों से पंचायती चुनाव से दूर रहे बिंदुखत्ता के करीब 70 हजार लोगो के मन में इस बार पंचायती चुनाव की आस जग गई है।
जिसके पीछे वजह यह है कि पहली बार वन अधिकार अधिनियम के तहत बिंदुखत्ता वासियों द्वारा किए गए सामूहिक दावों को जिलाधिकारी ने स्वीकृत कर लिया है। जिसके बाद ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री समेत तमाम मंत्रियों और अधिकारियों को ज्ञापन प्रेषित कर वनाधिकार कानून में दिए प्रावधानों के अनुसार बिना राजस्व ग्राम की अधिसूचना की प्रतीक्षा किए आगामी पंचायत चुनावों में शामिल करने की मांग की है।
बिंदुखत्ता एक ऐसा गांव है जहां पर पूरे उत्तराखंड के लोग निवास करते है। पर्वतीय क्षेत्रों में पहाड़ जैसी समस्याओं से घिरे लोगो ने एक सुरक्षित भविष्य की कल्पना के साथ दशकों पूर्व यहां पर अपना आशियाना बनाया। नैनीताल जनपद के 70 हजार की आबादी वाले इस सबसे बड़े गांव की 75 फीसदी आबादी पूर्व या वर्तमान सैनिकों की है।
यहां के आधा दर्जन यूवाओ ने देश सेवा अपने प्राणों बलिदान दिया है। कश्मीर घाटी में 10 आतंकियों को मार गिराकर वीरगति को प्राप्त हुए अशोक चक्र विजेता शहीद मोहन नाथ गोस्वामी भी यही के निवासी है। बिंदुखत्ता में बीजली, सड़क, शिक्षा समेत तमाम सुविधाएं पहले से ही मौजूद है।
लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाओं में जनप्रतिनिधि चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले यहां के लोगो को कई दशकों के इंतजार के बावजूद ना तो राजस्व गांव ही मिल पाया और ना ही पंचायत चुनाव का हक।
इधर पिछले दिनों बिंदुखत्ता वासियों द्वारा वन अधिकार अधिनियम के तहत राजस्व गांव का सामूहिक दावा पेश किया गया। जिसे जिला स्तरीय समिति द्वारा स्वीकृत कर लिया है। जबकि वन अधिकार अधिनियम 2006 के संशोधन नियम 2012 के नियम संख्या-16 के अन्तर्गत वन अधिकार धारकों को दावा पश्चात उनके उत्थान के लिए पंचायती राज समेत तमाम विभागो से मिलने वाली सभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए।
यानी वन अधिकार के दावा धारकों को इसका पंचायत चुनाव समेत अन्य लाभ भी मिल सकते है। जिसके बाद कई दसको से पंचायती चुनावों में रिफ्यूजी की तरह तटस्थ रहने वाले बिदुखत्ता वासियों में खुशी की लहर है।
जिसको संज्ञान में लेकर बिंदुखत्ता वन अधिकार समिति द्वारा पिछले दिनों मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री समेत तमाम मंत्रियों और अधिकारियों को ज्ञापन प्रेषित कर वनाधिकार कानून में दिए प्रावधानों के अनुसार बिना राजस्व ग्राम की अधिसूचना की प्रतीक्षा किए आगामी पंचायत चुनावों में शामिल करने की मांग की है।
राजस्व गांव का दावा जिला स्तरीय समिति ने स्वीकृत कर शासन में भेज दिया है। शासन द्वारा कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है जिसकों पूरा किया जा रहा है। वन अधिनियम के नियमों के तहत पंचायत चुनाव समेत अन्य योजनाओं को लागू करवाने का प्रयास किया जाएगा।
डा मोहन बिष्ट, विधायक लालकुआं
कानूनी प्रावधानों के अनुसार जिला स्तरीय समिति में वन अधिकार अधिनियम के तहत राजस्व गांव का दावा पास होने के बाद पंचायती पंचायत चुनाव सहित सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को बिना किसी प्रतीक्षा के प्रारम्भ किया जा सकता है। सरकार और सम्बन्धित विभागों से पत्राचार जारी है।
भुवन चंद्र भट्ट, सचिव, वनाधिकारी समिति बिंदुखत्ता
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें
