हिमालय प्रहरी

पुराना पर्चा न लाने पर डॉक्टर का पारा हुआ हाई, बगैर इलाज करें ही मरीज को वापस लौटाया

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राजू अनेजा, हल्द्वानी। कहते हैं डॉक्टर भगवान के समान होता है और किसी मनोरोगी को सही करने वाला डॉक्टर तो बगैर दवाई के ही साइकोलॉजिकल तरीके से उसका उपचार कर देता है परंतु अक्सर विवादों में रहने वाले डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में एक मरीज पुराना पर्चा अपने साथ नहीं लाने पर मनोचिकित्सक विभाग की एक सीनियर डॉक्टर ने मरीज को देखने से ही मना कर दिया। मामले में मरीज ने प्राचार्य से शिकायत करके पूछा है कि किस नियम के तहत उसे वापस भेजा गया है।

एसटीएच के मनोरोग विभाग में एक मरीज तनाव संबंधित बीमारी को लेकर विभाग की सीनियर डॉक्टर से अपना उपचार करा रहा है। विगत ढाई माह से उपचार चल रहा है। बुधवार को मरीज फिर से दिखाने पहुंचा तो उसने डॉक्टर को बताया कि उसका पर्चा खो गया है लेकिन उसने दवा का सॉल्ट बताया जो वह खाता है।

 

इस पर डॉक्टर भड़क गईं और मरीज को देखने से ही मना कर दिया। मरीज ने जबकि पुन: बताया कि पर्चा खो गया है। जिसे ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बाद भी डॉक्टर नहीं मानी। बाद में मरीज ने मनोरोग विभाग के अन्य डॉक्टर को दिखाया। इस मामले में मरीज ने प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी को लिखित में शिकायत दी है कि और पूछा है कि वह कौन सा नियम है जिसमें यदि मरीज के पास पुराना पर्चा उपलब्ध नहीं तो डॉक्टर उसे देखने से ही मना कर देगा। प्राचार्य ने मामले को देखने के लिए कहा है।

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