हिमालय प्रहरी

बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव के नाम पर एक बार और धोखा देने की तैयारी

खबर शेयर करें -

लालकुआं: सच ही तो है कि जनप्रतिनिधि वोट बटोरने के लिए झूठ बोलने से भी नही कतराते है। ऐसा ही झूठ कई वर्षों से बिन्दुखत्ता की जनता के साथ बोला जा रहा है। और भोली भाली जनता मासूम जनप्रतिनिधियों के झूठ को सच मानती आ रही है। और अंत में अपने आप को ठगा महसूस करते है।
पिछले चार दशकों से बिन्दुखत्ता की 70 लाख आबादी राजस्व गांव की मांग कर रही है। जबकि जनता की दुखती रग पर हाथ रखकर जनप्रतिनिधि लोकसभा व विधानसभा के चुनावों में राजस्व गांव दिलाने का वादा कर वोट बटोरते आते है। और चुनाव जीतने के बाद इस मुद्दे को अगले चुनाव के लिए सहेज कर रख दिया जाता है। जबकि हकीकत ठीक इसके विपरीत है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में भारत सरकार ने 2006 में उत्तराखंड के नैनीताल, उधम सिंह नगर व चंपावत जिले के वन ग्रामों को राजस्व गांव में परिवर्तित करने में रोक लगाई है। ऐसे में स्पष्ट है कि बिन्दुखत्ता के लोगो को राजस्व गांव आश्वासनों पर नहीं मिल सकता है। जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट में ठोस पैरवी करनी होगी। लेकिन जनप्रतिनिधि हर बार राजस्व गांव बनाने का झूठा वादा कर लोगों को ठगते आ रहे हैं। अगर वादे के अनुरूप किसी जनप्रतिनिधि ने सुप्रीम कोर्ट में तमाम प्रमाणों के साथ ठोस पैरवी की होती तो स्थिति कुछ और ही होती। लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि नहीं चाहता कि वोट बटोरने के अचूक हथियार राजस्व गांव का मुद्दा समाप्त हो जाये।

वास्तविक स्थिति से सरकार व कोर्ट को अवगत कराएं जनप्रतिनिधि
लालकुआं: दरअसल वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार की नजर में बिन्दुखत्ता में घनघोर जंगल है। स्पष्ट है कि इसी तथ्य को सुप्रीम कोर्ट में भी पेश किया होगा। लेकिन बिन्दुखत्ता की भौगोलिक स्थिति, यहां के विकास कार्य, यहां के सैनिकों की शौर्य गाथा, प्रतिभाओ द्वारा देश के लिए किए गए कार्य अपने आप मे नजीर है। लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने यहां की वास्तविक स्थिति से सुप्रीम कोर्ट व भारत सरकार को अवगत कराया होता तो तस्वीर अलग होती।

तुम मुझे वोट दो में तुम्हे राजस्व गांव दूंगा
लालकुआं: चुनाव नजदीक आते ही एक बार फिर जनप्रतिनिधि राजस्व गांव का मुद्दा लेकर जनता के बीच में आने लगे हैं। हर कोई यही कह रहा है कि मुझे जिताओं में तुम्हें राजस्व गांव दिलाऊंगा और सीधी-सादी जनता एक बार फिर धोखा खाने को तैयार बैठी है।

Exit mobile version