उत्तराखंड में चुनाव निपटने के बाद से भाजपा के अंदरखाने चल रहा भितरघात का प्रकरण अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के अंदर भितरघात के आरोपों की जांच की जा रही है। जिसको लेकर जल्द ही कार्रवाई तय है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के एक बयान ने पार्टी में हलचल मचा दी है। मीडियो को दिए बयान में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सभी आरोपों पर जांच चल रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार ही पार्टी कदम उठाएगी।

पूरा प्रदेश जहां 10 मार्च के परिणाम का इंतजार कर रहा है तो वहीं भाजपा में भी 10 मार्च के बाद बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। पार्टी के अंदर चुनाव परिणाम के आधार पर सरकार से लेकर संगठन में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। जिसके लिए पार्टी के दिग्गज नेताओं की ओर से भी तैयारी की जा रही है। पार्टी भितरघात के आरोपों से पूरी तरह से बैकफुट में आ चुकी है। लेकिन इन आरोपों की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। मीडिया में अब तक 6 विधायक भितरघात को लेकर बयान दे चुके हैं। जिससे साफ है कि इन विधायकों के आरोपों की जांच होगी। एक तरफ भितरघात के आरोपों की झड़ी लगी हुई है, वहीं दूसरी तरफ सीनियर नेताओं के केन्द्रीय नेतृत्व से संवाद जारी है।
त्रिवेंद्र का दावा, आरोपों की हो रही जांच
इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया में एक बयान देकर हलचल मचा दी है। त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है जो भी आरोप लगे हैं, उनकी जांच की जा रही है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का मामला भी है। जिससे साफ है कि पार्टी ने अपने विधायकों के आरोपों को गंभीरता से लिया है। जिसके आधार पर जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसमें एक बात ये भी सामने आई है कि पार्टी ऐसे कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की लिस्ट तैयार कर रही है। जो इन सभी प्रकरणों में शामिल हो सकते हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत को आने वाले समय में उत्तराखंड संगठन में अहम जिम्मेदारी मिलने का दावा किया जा रहा है। रावत के समर्थकों का दावा है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इस तरह के बयानों के आधार पर माना जा सकता है त्रिवेंद्र के इस बयान से उनका विश्वास भी झलक रहा है। जो कि 10 मार्च के बाद होने वाले बदलाव के लिए काफी है।
प्रदेश अध्यक्ष में बदलाव तय, त्रिवेंद्र-निशंक दौड़ में
इधर भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी चर्चा होने लगी है। जिस तरह से बीते दिनों में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और त्रिवेंद्र सिंह रावत अचानक से एक्टिव हुए हैं। उससे दोनों के प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में शामिल होने का दावा किया जा रहा है। भाजपा अगर सरकार बनाने में कामयाब होती है तो निशंक की दोनों जगह खासा भूमिका रह सकती है। जबकि त्रिवेंद्र रावत की संगठन में ज्यादा आवश्यकता पड़ सकती है। त्रिवेंद्र को संगठन चलाने का पुराना अनुभव भी है। जो कि पार्टी के लोकसभा चुनाव तक काम आ सकता है। इसी तरह निशंक और त्रिवेंद्र के अनुभवों को पार्टी उपयोग में ला सकती है। हालांकि सूत्र दावा कर रहे हैं कि त्रिवेंद्र सिंह रावत का पलड़ा ज्यादा मजबूत है। निशंक की सरकार बनाने में ज्यादा भूमिका मानी जा रही है।
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