उत्तराखंड चुनाव के सिलसिले में कांग्रेस ने एक बार फिर पोस्टल बैलेट मामले में बड़े आरोप लगाए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री और इस बार लालकुआं सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी हरीश रावत ने अपने विधानसभा क्षेत्र के पोस्टल बैलेट जवानों तक न पहुंचने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उंगली उठाई है. इससे पहले एक जवान द्वारा कइयों के वोट टिक करने वाला एक वीडियो पोस्ट करते हुए रावत ने पोस्टल बैलेट में हेरफेर का मुद्दा उठाया था, जिस पर आयोग ने मुकदमा दर्ज करने के निर्देश भी दिए थे. इधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस बार पोस्ट बैलेट सूची पर ही सवालिया निशान लगा दिए हैं.
उत्तराखंड कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि के हवाले से कहा गया कि गणेश गोदियाल ने एक पत्र ज़िला निर्वाचन अधिकारी को लिखकर आरोप लगाया है कि पोस्टल बैलेट सूची में ऐसे लोगों के भी नाम हैं, जिनका स्वर्गवास हो चुका है. महर्षि के हवाले से खबरों में कहा जा रहा है कि इस पत्र में सर्विस वोटरों की लिस्ट में रिटायर्ड, दिवंगत और लंबे अवकाश पर चल रहे लोगों के नाम भी दर्ज हैं. पत्र में इस बात के सबूत के तौर पर कई ज़िलों के निर्वाचन अधिकारियों की ओर से जारी की गई लिस्ट में चिह्नित नाम बताए गए हैं. इधर, हरीश रावत ने भी चुनाव की निष्पक्षता पर उंगली उठा दी है.
चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल!
कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान के प्रमुख रहे रावत ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि रुद्रपुर की पीएसी वाहिनियों के पोस्टल बैलेट न पड़ना उनके अधिकारों के हनन का ही मामला है. लेकिन ‘मेरे लिए एक चुनौतीपूर्ण सवाल खड़ा हो गया है, जो सीधे मेरे चुनावी हित से जुड़ा है.’ इस ट्वीट में रावत ने साफ सवाल किया कि ‘सिर्फ लालकुआं के ही पोस्टल बैलेट क्यों वोटरों तक नहीं पहुंचे?’ लालकुआं सीट से चुनाव लड़ रहे रावत ने इसे चुनाव और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल बताया.
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