हिमालय प्रहरी

लालकुआं में देश के पहले सुगंधित उद्यान का उद्घाटन, 140 विंभिन्न सुगंधित पौधों की प्रजातियां मौजूद

खबर शेयर करें -

उत्तराखंड वन विभाग के अनुसंधान ने नैनीताल जिले के लालकुआं में एक ‘सुगंधित उद्यान’ खोला है. यह उद्यान 3 एकड़ में फैला है. इसमें लगभग 140 विभिन्न सुगंधित पौधों की प्रजातियां हैं. यह देश का पहला Aromatic Garden है, जिसका नाम (सुरभि वाटिका) रखा है.

140 विलुप्त पौधों को करेगा संरक्षितः गार्डन के स्थापना करने का मुख्य उद्देश्य तुलसी अश्वगंधा पौधे के प्रजातियों को संरक्षित करना और इसके महत्व को लोगों को बताना है. इसके अलावा अनुसंधान केंद्र द्वारा लोगों तक एरोमेटिक पौधों को भी वितरित करने का काम किया जाएगा. उत्तराखडं के मुख्य वन संरक्षक और निदेशक अनुसंधान केंद्र संजीव चतुर्वेदी और वन टच एग्रीकॉन संस्था महाराष्ट्र बीना राव ने गार्डन का उद्घाटन करते हुए बताया कि अनुसंधान केंद्र ने देश का पहला एरोमेटिक गार्डन का स्थापना किया है.

3 एकड़ में फैला है उद्यानः  लालकुआं में लगभग 3 एकड़ क्षेत्र में स्थापित किया गया है. परियोजना की शुरुआत वित्तीय वर्ष 2018-19 में अनुमोदन के अनुसार की गई थी. केंद्र की कैंपा योजना के तहत परियोजना को वित्त पोषित किया गया है.

लालकुआं को साइट के रूप में चुना गया था, क्योंकि यह कुछ औद्योगिक इकाइयों से आने वाली बदबू के कारण दुर्गंध की स्थायी समस्या के लिए जाना जाता है. सुगंधित उद्यान में तुलसी वाटिका है जिसमें तुलसी की 20 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं, जिनमें राम तुलसी, श्याम तुलसी, वन तुलसी, कपूर तुलसी के साथ-साथ अफ्रीकी, इतालवी और थाई तुलसी शामिल हैं.

दक्षिण भारत से चंदन, उत्तर पूर्व से अगरवुड, तटीय क्षेत्रों से केवड़ा और तराई क्षेत्र से पारिजात, इसके अलावा नीम चमेली, हजारी मोगरा, सोंटाका, कहमेली, रात की रानी, ​​दिन का राजा और अनंत कुछ सबसे सुगंधित लोकप्रिय प्रजातियां हैं.

सुगंधित उद्यान में मौजूदः इसमें जैस्मीन की 9 अलग-अलग प्रजातियां, पुदीने की 4 अलग-अलग प्रजातियां, हल्दी की 4 अलग-अलग प्रजातियां और अदरक की 3 अलग-अलग प्रजातियां है. इन सुगंधित पौधों के अर्क का उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों में स्वाद और सुगंध के प्रयोजनों के लिए किया जाता है. इसी तरह, ये पौधे मसालों, कीटनाशकों और विकर्षक बनाने में बहुत उपयोगी है.

Exit mobile version