नैनीताल. ‘पार्टी को अपने मूल कार्यकर्ताओं को ही तवज्जो देनी चाहिए, वरना हतोत्साहित महसूस करने वाले कार्यकर्ताओं के भीतर रोष पैदा हो सकता है.’ उत्तराखंड चुनाव से पहले हुए घटनाक्रम के बाद नैनीताल में भाजपा के कार्यकर्ताओं की भावनाएं कुछ इस तरह उजागर हो रही हैं. इस सीट से संजीव आर्य विधायक रहे, लेकिन कुछ समय पहले उन्होंने अपने पिता यशपाल आर्य के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया. स्थिति यह है कि भाजपा के नेता इस बार चुनाव में टिकट मिलने की आस में थे, तभी कांग्रेस की महिला मोर्चे की प्रमुख सरिता आर्य ने भाजपा में एंट्री ले ली. अब भाजपा के भीतर टिकट को लेकर घमासान मचा हुआ है.
कांग्रेस से टिकट के दो दावेदारों का पिछले कुछ ही दिनों के भीतर बीजेपी में शामिल हो जाना नैनीताल सीट पर समीकरण उलझाने वाला घटनाक्रम दिख रहा है. भाजपा छोड़कर गए संजीव आर्य के लिए कांग्रेस से टिकट का रास्ता ज़रूर साफ़ है, लेकिन बीजेपी में आए नेताओं के कारण संगठन में बेचैनी बढ़ गई है. टिकट के दावेदार प्रकाश आर्य से लेकर दिनेश आर्य व मोहनपाल कशमकश में हैं, तो कांग्रेस से आई सरिता आर्य अपना दावा मजबूत बता रही हैं. वहीं, भाजपा के भीतर चल रही इस रस्साकशी पर कांग्रेस चुटकी ले रही है.
दरअसल सरिता आर्य ने बीजेपी टिकट की शर्त पर जॉइन की. उनके इस तरह बीजेपी में आते ही कार्यकर्ताओं में रोष पैदा हो गया. नैनीताल सीट से भाजपा के टिकट के दावेदार प्रकाश आर्य समेत कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी को उन्हीं कार्यकर्ताओं को बढ़ावा देना चाहिए जो लंबे समय से निष्ठा के साथ पार्टी के लिए काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि संजीव आर्य के रूप में दलबदलुओं से भाजपा झटका खा चुकी है, अब सचेत होना चाहिए.’
एक तरफ भाजपा के कार्यकर्ता ये आरोप लगा रहे हैं कि पिछले पांच सालों में संजीव आर्य का उत्पीड़न उन्होंने सहा, वहीं सरिता आर्य इस खलबली को स्वाभाविक कह रही हैं. उनका कहना है कि टिकट पर दावा करने का हक सभी का है. इसे पार्टी के भीतर विरोध नहीं समझना चाहिए. एक बार जब टिकट का ऐलान हो जाएगा, सभी कार्यकर्ता पार्टी को जिताने के लिए एकजुट ही होंगे. बहरहाल, फिलहाल नज़र बीजेपी के प्रत्याशियों की पहली लिस्ट पर है, जिसका ऐलान आज या कल हो सकता है.
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