हिमालय प्रहरी

हैरान करने वाले पुलिस के कारनामे, तहरीर जालसाज के खिलाफ, मुकदमा दर्ज कर पीड़ित को ही बना दिया आरोपित

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गोंडा। नगर कोतवाली पुलिस का कारनामा इस समय चर्चा में है। उप निबंधक के तहरीर देने के बावजूद जालसाजी करने वाली महिला को छोड़ दिया गया और पीड़ित पक्ष को ही आरोपित बना दिया गया। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

16 जुलाई को दर्ज हुई थी शिकायत : सदर तहसील के जानकीनगर निवासी मधू मेहरोत्रा ने 16 जुलाई को उच्चाधिकारियों को पत्र देकर एक शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि उनके पति सुनील व स्वजन के नाम दर्ज सवा छह बीघा भूमि को परसपुर के नंदौर निवासी कलावती उर्फ पार्वती ने बैनामे का कूटरचित अभिलेख तैयार कराकर अपने नाम दर्ज करा लिया है।

अभिलेख में नहीं मिले अंगूठे के निशान : उनके पति ने उक्त भूमि का बैनामा नहीं किया है। उप निबंधक गोंडा सदर की जांच में पाया गया उक्त भूमि का कूटरचित दस्तावेज तैयार किया गया है। कार्यालय में उपलब्ध अभिलेख में विक्रेता के रूप में सुनील व अनूप, गवाह खेदू या सत्यनरायन के अंगूठे का निशान नहीं मिला।

तहरीर भेजी थी लेकिन नहीं दर्ज हुआ मुकदमा : नौ दिसंबर 1998 को दिखाए गए बैनामे के दस्तावेज संख्या 8349 पर कलावती के स्थान पर राजकुमारी का नाम दर्ज पाया गया। इस पर स्टांप की अदायगी भी नहीं की गई है। उप निबंधक ने 27 जुलाई को ही कलावती के खिलाफ एफआइआर के लिए तहरीर भेजी थी लेकिन, मुकदमा नहीं हुआ।

पूछताछ के लिए थाने ले गई पुलिस : 28 जुलाई को कलावती उक्त भूमि का सीतापुर निवासी ललितेश कुमार सिंह के नाम एग्रीमेंट करने के लिए आई थीं। मामला संदिग्ध होने पर सूचना एडीएम व पुलिस को दी गई। पुलिस पूछताछ के लिए कलावती व उनकी पुत्री करिश्मा को थाने ले गई।

पुलिस के कारनामे से हर कोई हैरान : उप निबंधक ने दोबारा एफआइआर के लिए तहरीर भेजी थी। 29 जुलाई को नगर कोतवाली पुलिस ने पीड़ित मधु मेहरोत्रा के पति अनूप समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा कर लिया। जबकि जालसाजी करके भूमि हड़पने की साजिश करने वाली कलावती व उनकी बेटी को छोड़ दिया गया। पुलिस के कारनामे से हर कोई हैरान है।

विभागीय जांच में नंदौर गांव की कलावती उर्फ पार्वती जालसाजी करके भूमि हड़पने के लिए दोषी पाई गई थीं। पुलिस कलावती व गवाह करिश्मा को थाने ले गई थी और उन्ही के खिलाफ तहरीर भी दी गई थी। एफआइआर कैसे अनूप के खिलाफ हो गई है, इसका जवाब पुलिस ही दे सकती है। – सुधा यादव, उप निबंधक गोंडा सदर

उप निबंधक सदर की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इस पत्र पर वरिष्ठ अधिकारियों का निर्देश था। मामले की जांच चल रही है, जो भी तथ्य होंगे सामने आएंगे। रही बात पूछताछ के लिए लाई गई महिलाओं को छोड़ने की तो कोई मारपीट का मामला नहीं था। जालसाजी का मामला है, साक्ष्य की आवश्यकता होती है। साक्ष्य संकलन करके कार्रवाई की जाएगी। – पंकज सिंह, नगर कोतवाल

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