देहरादून: उत्तराखंड एसटीएफ ने ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाइयां बेचने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में एसटीएफ ने अब तक मास्टरमाइंड सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, देहरादून पुलिस ने फर्जी रजिस्ट्री मामले में फरार चल रही ₹10,000 की इनामी महिला आरोपी को भी हरियाणा से गिरफ्तार किया है।
नकली दवाइयों के रैकेट का भंडाफोड़
उत्तराखंड एसटीएफ ने ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाइयां बेचने वाले गिरोह के एक और सदस्य, मेडिकल स्टोर के मालिक पंकज शर्मा को पंजाब के जीरकपुर से गिरफ्तार किया है।
मामले का घटनाक्रम:
- 1 जून को एसटीएफ ने प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नकली रैपर, नकली आउटर बॉक्स, लेबल और क्यूआर कोड भारी मात्रा में बरामद किए थे और संतोष कुमार नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।
- जांच आगे बढ़ने पर एसटीएफ ने नवीन बंसल, आदित्य काला और देवी दयाल गुप्ता को भी गिरफ्तार किया।
- गिरफ्तार आरोपी नवीन बंसल ने खुलासा किया कि वह ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाइयां तैयार कर पंचकुला, हरियाणा में स्थित नोबल फार्मेसी/लाइफ साइंस के मालिक पंकज शर्मा को बेचता था।
- इस जानकारी के आधार पर, एसटीएफ ने पंकज शर्मा को गिरफ्तार कर लिया, जो पंचकुला, हरियाणा का निवासी है और वर्तमान में जीरकपुर, पंजाब में रह रहा था।
अपराध का तरीका:
आरोपी पंकज शर्मा ने बताया कि वह राजस्थान के नवीन बंसल और अन्य व्यक्तियों से ब्रांडेड दवा कंपनियों की नकली दवाइयां खरीदता था। इन दवाइयों को वह नोएडा, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के बाजारों में बेचता था, और अपने पंचकुला स्थित मेडिकल स्टोर पर भी बेचता था।
नकली दवाइयों को वह अपनी नोबल फार्मेसी के नाम पर रजिस्टर्ड एंबुलेंस में भरकर विभिन्न राज्यों के मेडिकल स्टोरों पर भेजता था। ऐसा करने का मकसद यह था कि रास्ते में पुलिस या ड्रग्स विभाग को कोई शक न हो और दवाइयां पकड़ी न जा सकें।
भारी मुनाफा और आगे की जांच:
इन नकली दवाइयों को बेचने पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था, जिससे आरोपियों को भारी मुनाफा होता था। एसटीएफ एसएसपी नवनीत भुल्लर ने बताया कि इस गिरोह ने अब तक करोड़ों रुपये की नकली दवाइयां बाजार में बेची हैं। गिरफ्तार आरोपी पंकज शर्मा इस गिरोह से साल 2019 से जुड़ा हुआ है। एसटीएफ की टीम अन्य राज्यों से भी जानकारी जुटा रही है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य व्यक्तियों और कंपनियों का पता लगाया जा सके।
फर्जी रजिस्ट्री मामले में इनामी महिला आरोपी गिरफ्तार
देहरादून पुलिस ने फर्जी रजिस्ट्री मामले में फरार चल रही ₹10,000 की इनामी महिला आरोपी पूनम चौधरी को हरियाणा के यमुनानगर से गिरफ्तार कर लिया है। पूनम चौधरी ने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किसी अन्य की भूमि की गिफ्ट डीड अपने नाम करवाई थी। इस मामले में पुलिस पहले ही महिला आरोपी के तीन अन्य साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
मामले का विवरण:
संदीप श्रीवास्तव, सहायक महानिरीक्षक निबंधन ने कौलागढ़ रोड, राजेंद्र नगर स्थित प्यारेलाल कॉल की भूमि के फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूमि का स्वामित्व किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्शाते हुए रजिस्ट्रार कार्यालय के रजिस्टरों में फर्जी तरीके से चस्पा करने के संबंध में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया था।
साजिश में शामिल आरोपी:
मुकदमे की जांच के दौरान पता चला कि भूमि के मूल मालिक प्यारेलाल कॉल के नाम से आरोपी स्वर्ण सिंह और अमित यादव ने अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। उन्होंने भूमि की एक फर्जी रजिस्ट्री स्वर्ण सिंह के नाम पर तैयार की, और स्वर्ण सिंह ने उसे उपहार पत्र के माध्यम से अमित यादव के नाम पर गिफ्ट डीड कर दिया। इसके बाद अमित यादव ने भूमि की गिफ्ट डीड पूनम चौधरी के नाम कर दी।
इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर, आरोपियों ने एडवोकेट कमल विरमानी के माध्यम से जमीन पर कब्जा लेने के लिए सिविल न्यायालय, देहरादून में एक आवेदन भी दाखिल किया था।
महिला आरोपी की गिरफ्तारी:
पुलिस ने पहले स्वर्ण सिंह, अमित यादव और कमल विरमानी को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन पूनम चौधरी मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही लगातार फरार चल रही थी। पुलिस ने उसके सभी संभावित ठिकानों पर दबिशें दी थीं, लेकिन कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो पाई थी। पूनम चौधरी के लगातार फरार रहने पर एसएसपी अजय सिंह ने उसकी गिरफ्तारी पर ₹10,000 का ईनाम घोषित किया था।
कोतवाली नगर प्रभारी प्रदीप पंत ने बताया कि कोतवाली पुलिस और एसओजी की टीम ने मिलकर पूनम चौधरी को मंगलवार को सेक्टर-17, यमुनानगर, हरियाणा से गिरफ्तार किया। उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
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