रामनगर (13 मार्च 2026): कोसी नदी के बीच स्थित गिरिजा देवी मंदिर के मिट्टी के टीले की सुरक्षा के लिए चल रहे निर्माण कार्य के दौरान गुरुवार को एक ऐतिहासिक ढांचा दिखाई दिया। टीले के करीब 3-4 मीटर नीचे वह गुफा नजर आई, जिसे दशकों पहले बंद कर दिया गया था।
1. गुफा का इतिहास: 1962 से 1971 तक का सफर
बुजुर्गों और मंदिर के पुजारियों के अनुसार, इस गुफा का अपना एक रोचक इतिहास है:
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आर-पार रास्ता: वर्ष 1962 के दौरान यह गुफा टीले के आर-पार खुली हुई थी। बताया जाता है कि तब ग्रामीण अपने पशुओं को इसी गुफा के रास्ते चरने के लिए ले जाते थे।
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प्राकृतिक जल स्रोत: गुफा के नीचे से पानी का बहाव भी होता था।
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1971 में हुई बंद: टीले की मजबूती को देखते हुए 1971 में तत्कालीन पुजारी स्व. पूर्ण चंद्र पांडे ने करीब 150 श्रमिकों की मदद से इसे कंक्रीट भरकर पूरी तरह बंद करवा दिया था। बाद में कोसी नदी की बाढ़ और मलबे के कारण यह पूरी तरह सतह के नीचे दब गई थी।
2. खोदाई में दिखी झलक, फिर किया गया बंद
वर्तमान में मंदिर के टीले को सुरक्षित करने के लिए गहरी खोदाई की जा रही है। इसी दौरान पुरानी कंक्रीट की दीवार गिरने से गुफा का द्वार फिर से खुल गया।
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सुरक्षा सर्वोपरि: प्रधान पुजारी ने बताया कि मंदिर की नींव और टीले की सुरक्षा को देखते हुए, निर्माण कार्य कर रहे श्रमिकों ने इसे तत्काल दोबारा कंक्रीट से सील कर दिया है ताकि मिट्टी का कटाव न हो।
3. एसडीएम का निरीक्षण: 30 अप्रैल तक पूजा बंद, सुरक्षा सख्त
मंदिर में फिलहाल मुख्य पूजा-अर्चना 30 अप्रैल तक बंद है, लेकिन पर्यटकों की आवाजाही जारी है। इसे देखते हुए एसडीएम गोपाल सिंह चौहान ने क्षेत्र का निरीक्षण किया:
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दुकानों पर सख्ती: एसडीएम ने निर्देश दिए हैं कि पुल के नीचे वाले हिस्से में कोई दुकान नहीं लगेगी। दुकानें केवल पुल के ऊपरी हिस्से में लगाई जा सकेंगी।
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बैरिकेडिंग: नदी के बहाव वाले क्षेत्र और पुल के नीचे की ओर जल्द ही बैरिकेडिंग की जाएगी ताकि श्रद्धालु या पर्यटक गहरे पानी में न जा सकें।
Snapshot: गिरिजा मंदिर अपडेट
| विवरण | जानकारी |
| गुफा का अस्तित्व | वर्ष 1962 के समय की (आर-पार रास्ता) |
| पुनः दिखने का कारण | टीले के सुदृढ़ीकरण हेतु चल रही गहरी खोदाई |
| सुरक्षा उपाय | कंक्रीट से दोबारा बंद किया गया (टीले की मजबूती हेतु) |
| प्रशासनिक निर्देश | 30 अप्रैल तक पूजा बंद, पुल के नीचे दुकान लगाना वर्जित |
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