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पिता के निधन के बाद चाय की दुकान संभाली, पढ़ाई की और अब बनीं पार्षद; अंजना रावत ने पेश की मिसाल

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पौड़ी गढ़वाल (8 मार्च 2026): श्रीनगर नगर निगम के वार्ड-21 की पार्षद अंजना रावत आज उन सभी युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं जो विषम परिस्थितियों में हार मान लेते हैं। ‘चाय की दुकान’ चलाने वाली एक सामान्य बेटी ने अपनी मेहनत के दम पर न केवल उच्च शिक्षा हासिल की, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में भी अपना परचम लहराया।

संघर्ष की शुरुआत: तानों के बीच थामी केतली

  • दुखों का पहाड़: वर्ष 2011 में पिता गणेश सिंह रावत के आकस्मिक निधन ने परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया। अंजना उस समय बहुत छोटी थीं, लेकिन उन्होंने पिता की चाय की दुकान को बंद होने से बचाने का जिम्मा उठाया।

  • सामाजिक चुनौतियां: शुरुआत में रिश्तेदारों और समाज के तानों का सामना करना पड़ा, लेकिन अंजना सुबह 8 से शाम 7 बजे तक दुकान पर डटी रहीं।

शिक्षा और सफलता का संगम

दुकान चलाने के साथ-साथ अंजना ने अपनी पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां किसी भी मेधावी छात्र को टक्कर देती हैं:

  • उच्च शिक्षा: उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से स्नातक के बाद MSW (2012) और समाज शास्त्र में MA (2015) की उपाधि हासिल की।

  • पारिवारिक जिम्मेदारी: दुकान की कमाई से उन्होंने अपनी बड़ी बहन की शादी कराई और भाई की पढ़ाई में भी पूरा सहयोग दिया।

सम्मान और राजनीति में प्रवेश

अंजना के इसी जज्बे और संघर्ष को देखते हुए उन्हें कई स्तरों पर पहचान मिली:

  1. तीलू रौतेली पुरस्कार: उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2021-22 में उन्हें राज्य के प्रतिष्ठित ‘तीलू रौतेली पुरस्कार’ से सम्मानित किया।

  2. नगर पार्षद: उनकी लोकप्रियता और सेवा भाव को देखते हुए स्थानीय जनता ने 2025 के नगर निगम चुनाव में उन्हें वार्ड-21 से अपना पार्षद चुना।

  3. चाय कु चस्का: आज उनकी दुकान ‘चाय कु चस्का’ पूरे श्रीनगर क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बना चुकी है।


अंजना रावत: एक नज़र में (Snapshot)

विवरण जानकारी
नाम अंजना रावत (पार्षद, वार्ड-21)
निवासी निरंजनी बाग, मैडांग (श्रीनगर)
शिक्षा MA (समाज शास्त्र), MSW
प्रमुख सम्मान तीलू रौतेली पुरस्कार (2021-22)
दुकान का नाम ‘चाय कु चस्का’
संदेश परिस्थितियां कैसी भी हों, शिक्षा और मेहनत से सब संभव है।

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