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अग्निवीर सचिन पौनियां को ‘बलिदानी’ का दर्जा; 7 महीने बाद गांव पहुंची बटालियन, सैन्य सम्मान के साथ दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

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उत्तरकाशी के धराली (हर्षिल घाटी) में 5 अगस्त 2025 को आए बादल फटने की घटना में लापता हुए सचिन पौनियां की शहादत पर आज सेना और प्रशासन ने मुहर लगा दी। सैन्य परंपरा के अनुसार ‘शोक शस्त्र’ की रस्म अदा की गई और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

1. आपदा के वो काले दिन और लंबा इंतजार

  • तैनाती: सचिन 30 अक्टूबर 2023 को अग्निवीर के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के बाद 19 जून को उनकी पहली पोस्टिंग हर्षिल घाटी में हुई थी।

  • हादसा: 5 अगस्त 2025 को तेलगाय गदेरे में आई बाढ़ के दौरान सचिन सहित 11 जवान बचाव कार्य में जुटे थे, तभी वे लापता हो गए।

  • DNA टेस्ट का मोड़: तलाशी के दौरान मिले एक क्षत-विक्षत शव का डीएनए टेस्ट कराया गया, लेकिन वह सचिन का नहीं निकला। इसके बाद लंबी विधिक प्रक्रिया चली और 18 दिसंबर को उन्हें अनंतिम रूप से मृत घोषित किया गया।

2. परिवार का टूटता सब्र और अधूरा वादा

सचिन के घर का माहौल देख हर किसी की आंखें नम थीं:

  • इकलौता चिराग: पिता चंद्रवीर सिंह के लिए सचिन केवल बेटा नहीं, बल्कि घर का इकलौता सहारा और कुल का दीपक था।

  • राखी का इंतजार: बहन श्वेता का विलाप पत्थर को भी पिघला दे। सचिन ने वादा किया था कि वह रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने जरूर आएगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

  • ताऊ का दर्द: “सचिन लौट आ, आंसू भी सूख गए…”—तस्वीर को सीने से लगाकर रोते ताऊ के इन शब्दों ने वहां मौजूद हर सैनिक और अधिकारी को भावुक कर दिया।

3. सैन्य सम्मान और प्रशासनिक उपस्थिति

  • गार्ड ऑफ ऑनर: राजपूताना राइफल्स की टुकड़ी ने हवा में गोलियां दागकर और शस्त्र झुकाकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी।

  • प्रशासनिक नमन: एसडीएम सदर राजबहादुर ने शहीद के चित्र पर माल्यार्पण किया और परिवार को ढांढस बंधाया। उन्होंने पुष्टि की कि उत्तरकाशी प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर अब सचिन को बलिदानी का दर्जा मिल चुका है।


Snapshot: बलिदानी सचिन पौनियां का सफर

विवरण जानकारी
नाम सचिन पौनियां (23 वर्ष)
रेजीमेंट 14वीं बटालियन, राजपूताना राइफल्स (अग्निवीर)
गांव करील, मुरसान (हाथरस)
घटना तिथि 5 अगस्त 2025 (उत्तरकाशी आपदा)
दर्जा बलिदानी (23 मार्च 2026 को आधिकारिक सम्मान)

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