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अल्मोड़ा का लाल देश पर न्योछावर: राजौरी में ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के दौरान लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद, क्षेत्र में शोक और गर्व की लहर

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अल्मोड़ा: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवादियों के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा चलाए जा रहे विशेष सर्च अभियान ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के दौरान उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले ने अपना एक और जांबाज सपूत खो दिया है। देश की सीमा पर मुस्तैदी से तैनात युवा सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए हैं। उनके सर्वोच्च बलिदान की खबर मिलते ही पूरे अल्मोड़ा जनपद में गहरे दुख के साथ-साथ गर्व की लहर दौड़ गई है।

दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन के दौरान हुआ हादसा

सैन्य सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह दुखद घटना राजौरी के अत्यधिक दुर्गम और संकरे पर्वतीय इलाके में गश्त के दौरान घटित हुई:

  • गहरी खाई में फिसले: ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के तहत सर्च अभियान का नेतृत्व करते समय पैर फिसलने के कारण लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी अचानक एक गहरी खाई में गिर गए।

  • इलाज के दौरान पाई वीरगति: इस भीषण हादसे में उन्हें अत्यंत गंभीर चोटें आईं। सैन्य रेस्क्यू टीम द्वारा उन्हें तुरंत नजदीकी सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस लेते हुए वीरगति प्राप्त की। सेना मुख्यालय द्वारा घटना की आधिकारिक पुष्टि के बाद परिजनों को सूचित किया गया।

कम उम्र में बने थे सैन्य अधिकारी; पूरे क्षेत्र को था नाज

शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी मूल रूप से अल्मोड़ा जनपद के बगवालीपोखर क्षेत्र के रहने वाले थे, जबकि उनका परिवार वर्तमान में अल्मोड़ा के ही पांडेखोला में निवास करता है। बीरेश्वर बचपन से ही बेहद होनहार, अनुशासित और देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत थे। बहुत ही कम उम्र में भारतीय सेना में अधिकारी बनकर उन्होंने पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया था। उनके असमय चले जाने से माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीण अपने इस लाडले की शहादत पर गर्व कर रहे हैं।

बुधवार को पैतृक आवास पहुंचेगा पार्थिव शरीर; सैन्य सम्मान के साथ होगी अंत्येष्टि

शहीद सैन्य अधिकारी को नमन करते हुए और आगामी विधिक प्रक्रिया की जानकारी साझा करते हुए सेवानिवृत्त सैन्य कल्याण अधिकारी विजय मनराल ने बताया:

“शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का पार्थिव शरीर बुधवार को उनके पैतृक निवास स्थान अल्मोड़ा पहुंचने की पूरी संभावना है। इसके बाद पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंतिम विधिक अंत्येष्टि की जाएगी।”

विजय मनराल, सेवानिवृत्त सैन्य कल्याण अधिकारी

वीर सपूत के अंतिम दर्शनों के लिए बुधवार को भारी संख्या में सैन्य अधिकारियों, प्रशासनिक अमले, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय जनता के जुटने की उम्मीद है। लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की इस अमर शहादत पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, स्थानीय विधायकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए अमर शहीद को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। देवभूमि अपने इस वीर बेटे के बलिदान को हमेशा याद रखेगी।

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