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अल्मोड़ा के युवा वैज्ञानिक रवि टम्टा ने बनाई उड़ने वाली कार ‘हपिडा स्काईनेक्स’: 12 साल बाद पूरा हुआ आसमान में उड़ने का सपना

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अल्मोड़ा। “मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।” इन पंक्तियों को अल्मोड़ा जिले के धौलादेवी ब्लॉक अंतर्गत काफलीखान निवासी नवाचारी युवा रवि टम्टा ने सच कर दिखाया है। बचपन से ही आसमान में उड़ने का सपना देखने वाले रवि ने 12 साल पहले अधूरा रहा अपना सपना अब उड़ने वाली कार ‘हपिडा स्काईनेक्स’ (पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल) बनाकर पूरा कर लिया है। उनके इस अनूठे नवाचार की क्षेत्र भर में सराहना हो रही है।
12 साल पहले बनाया था हेलीकॉप्टर, प्रशासन की अनुमति न मिलने पर बनाया नया कीर्तिमान
नवाचारी रवि टम्टा ने महज 20 वर्ष की उम्र (वर्ष 2014) में अपने गांव में दो साल की कड़ी मेहनत के बाद हेलीकॉप्टर तैयार कर लिया था। हालांकि, उस समय किसी दुर्घटना की आशंका और प्रशासनिक अनुमति न मिल पाने के कारण उनका हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका। उस निराशा को रवि ने अपनी ताकत बनाया और स्वदेशी फ्लाइंग व्हीकल विकसित करने में जुट गए। नैनीताल परिसर से बीए स्नातक रवि टम्टा की पत्नी सुनीता वर्ष 2019 में बीडीसी सदस्य रह चुकी हैं।
चीड़ की पिरुल से रोजगार और पर्यावरण संरक्षण: 10 जिलों में चल रहा जायका (JICA) मॉडल
उड़ने वाली तकनीक के साथ ही रवि टम्टा ने पर्यावरण व वनाग्नि संरक्षण के क्षेत्र में भी बड़ी पहल की है। उन्होंने ‘हपिडा पाइनपीट’ मशीन बनाई है, जो जंगलों में आग का कारण बनने वाली चीड़ की सूखी पत्तियों (पिरुल) को प्रोसेस कर पाइनपीट बनाती है। इसका उपयोग नर्सरी, बागवानी और मशरूम उत्पादन में हो रहा है, जबकि इससे बने बायो-पेलेट्स ऊर्जा उत्पादन में काम आते हैं। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से यह मॉडल उत्तराखंड के 10 जिलों में संचालित हो रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है।
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