नई दिल्ली/देहरादून। चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर देश की राजधानी दिल्ली स्थित राजघाट पर बापू की समाधि के समीप धरने पर बैठे अंकिता के माता-पिता को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने का मामला सामने आया है। इस दौरान धक्का-मुक्की और पुलिसिया कार्रवाई के बीच अंकिता की मां सोनी देवी अचानक अचेत होकर गिर पड़ीं, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल भर्ती कराया गया। एनजीओ संचालिका योगिता भयाना और उत्तराखंड कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर इस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
तबीयत बिगड़ने पर बुराड़ी अस्पताल में कराया भर्ती
घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंकिता भंडारी के माता-पिता न्याय की गुहार लगाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। तभी दिल्ली पुलिस की टीम ने उन्हें जबरन मौके से हटा दिया। बताया जा रहा है कि हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस की गाड़ी में इधर-उधर घुमाए जाने के दौरान अंकिता की मां सोनी देवी की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने लगी और वे अचेत हो गईं। बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें तत्काल बुराड़ी स्थित एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
गणेश गोदियाल का बयान: “अमित शाह के दौरे से पहले डराना-धमकाना अनुचित”
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एक वीडियो जारी कर इस पूरी कार्रवाई पर कड़ा आक्रोश जताया है। उन्होंने अंकिता के पिता से फोन पर बात करने के बाद बयान जारी करते हुए कहा:
“केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उत्तराखंड दौरे से ठीक पहले अंकिता के पीड़ित माता-पिता को इस तरह परेशान करना, डराना और धमकाना बिल्कुल अनुचित है। वे बेहद शांतिप्रिय लोग हैं और अपनी बेटी के न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनसे किसी को कोई खतरा नहीं है। अंकिता के माता-पिता को दिल्ली पुलिस तुरंत रिहा करे और दिल्ली में मौजूद उत्तराखंड के सभी नागरिक उनसे संपर्क कर हर संभव सहायता पहुंचाएं।”
हरक सिंह रावत ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरा
इधर, उत्तराखंड कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार अंकिता के परिजनों से भयभीत हो चुकी है।
हरक सिंह रावत ने कहा:
“यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब भी अंकिता के माता-पिता अपनी आवाज उठाने इंडिया गेट या राजघाट की ओर जाते हैं, तो दिल्ली पुलिस उन्हें हिरासत में ले लेती है। पुलिस द्वारा काफी देर तक उन्हें सड़कों पर घुमाया गया और जब उनकी माता की स्थिति गंभीर हो गई, तब जाकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह कार्रवाई सरकार की बौखलाहट और संवेदनहीनता को दर्शाती है।”