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अंकिता भंडारी हत्याकांड: कांग्रेस नेताओं पर दर्ज मुकदमों पर गरमाई राजनीति, हेमवती नंदन दुर्गापाल ने भाजपा सरकार पर बोला तीखा हमला

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लालकुआं, (उत्तराखंड)। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ का नाम सामने आने और उसके विरोध में लोकभवन गेट तक प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस नेताओं पर पुलिस द्वारा मुकदमे दर्ज किए जाने को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में उबाल आ गया है। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के युवा नेता एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव हेमवती नंदन दुर्गापाल ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे भाजपा सरकार की तानाशाही करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार पुलिस के बल पर विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है, लेकिन कांग्रेस अंकिता को न्याय दिलाने के लिए पीछे हटने वाली नहीं है।

लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार कुचल रही सरकार— दुर्गापाल

किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव हेमवती नंदन दुर्गापाल ने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना और विरोध प्रदर्शन करना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन सत्ता के घमंड में चूर भाजपा सरकार पुलिस का सहारा लेकर विपक्ष को डराने का प्रयास कर रही है। सरकार पूरी तरह से डर चुकी है, यही कारण है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत समेत 30 नामजद और 10-15 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितने मुकदमे दर्ज करे, ‘अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’ की गूंज तब तक थमेगी नहीं, जब तक प्रदेश की बेटियों को न्याय नहीं मिल जाता।

कथित ‘वीआईपी’ की नियुक्ति को बताया परिवार के जख्मों पर नमक

दुर्गापाल ने अंकिता हत्याकांड से जुड़े कथित ‘वीआईपी’ के संदर्भ में गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में जिस व्यक्ति का नाम चर्चा में रहा है, उसे संवैधानिक पद देकर राज्यपाल बनाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनहीन है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने और संशय दूर होने से पहले संदिग्ध को पद से नवाजा जाना अंकिता के माता-पिता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। यह सीधे तौर पर सबूतों और जांच को प्रभावित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता आज भी न्याय की गुहार लगा रहे हैं, जबकि धामी सरकार न्याय मांगने वालों पर ही एफआईआर दर्ज करने में व्यस्त है।

आर-पार की लड़ाई का ऐलान, मुकदमे वापस न लेने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

युवा नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल एक बेटी की नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की माताओं-बहनों की अस्मिता और सम्मान की है। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस नेताओं पर दर्ज किए गए राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमे तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं और मामले की निष्पक्ष केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच सुनिश्चित की जाए। दुर्गापाल ने ऐलान किया कि यदि सरकार का यही रवैया रहा, तो लालकुआं सहित पूरे उत्तराखंड का युवा और किसान सड़क से लेकर सदन तक आर-पार की उग्र लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य होगा।
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