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अंकिता हत्याकांड: 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का व्यापक असर, आंदोलनकारी CBI जांच के बावजूद अड़े

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उत्तराखंड: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर आज 11 जनवरी को उत्तराखंड में माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर राज्यभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है और ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ ने पूरे उत्तराखंड में बंद का आह्वान किया है।

सड़कों से लेकर बाजारों तक इस बंद का असर देखने को मिल रहा है, हालांकि कई व्यापारिक संगठनों ने इसे समर्थन देने से इनकार कर दिया है।

⚖️ आंदोलनकारियों की मुख्य मांग

सरकार द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश करने के बावजूद, आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं:

सरकारी फैसला आंदोलनकारियों की मांग
सीबीआई जांच की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराई जाए।

शनिवार को विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से बंद को जारी रखने का फैसला लिया गया।

🕯️ मशाल जुलूस और विरोध प्रदर्शन

  • विरोध का तरीका: शनिवार शाम को गांधी पार्क से शहीद स्मारक तक मशाल जुलूस निकालकर विरोध जताया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

  • वीआईपी का नाम: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब तक इस मामले में वीआईपी की भूमिका सामने नहीं आई है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच आवश्यक है।

  • प्रवासी उत्तराखंडी: प्रवासी उत्तराखंडी संगठनों ने भी सीबीआई जांच की सिफारिश का समर्थन किया, लेकिन साथ ही सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में जांच कराने की मांग को दोहराया और केंद्रीय मंत्रियों को ज्ञापन सौंपा।

🛍️ व्यापारी संगठनों का रुख

  • समर्थन से इनकार: प्रदेश के व्यापारिक संगठनों ने बंद को समर्थन नहीं दिया है।

  • व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष नवीन चंद्र वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद अब बंद का कोई औचित्य नहीं रह गया है, और राज्यभर की 383 नगर इकाइयों के व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले रहेंगे।

🚓 पुलिस की सख्ती

आईजी राजीव स्वरूप ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि:

“यदि कोई जबरन बाजार बंद कराने या चक्काजाम करने की कोशिश करेगा तो पुलिस सख्ती से निपटेगी।” उन्होंने लोगों से अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

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