
राजू अनेजा,नई दिल्ली। पाक महीने रमज़ान में जहां लोग इबादत और सवाब की बात करते हैं, वहीं राजधानी में ईमानदारी की ऐसी मिसाल सामने आई जिसने इंसानियत पर भरोसा और मजबूत कर दिया। रोहिणी सेक्टर-26 की रहने वाली चांदनी कुमारी ने घर का पुराना सामान बेचते समय एक लोहे की अलमारी भी कबाड़ में दे दी। उन्हें क्या पता था कि उसी अलमारी के लॉकर में करीब 10 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने रखे रह गए हैं।
अलमारी खरीदकर ले गए रोहिणी सेक्टर-16 के कबाड़ी अशरफ मिया। अगले दिन जब उन्होंने अलमारी खोली तो लॉकर में रखा एक स्टील का डिब्बा देखकर हैरान रह गए। डिब्बा खुला तो अंदर से निकले सोने के झुमके, अंगूठियां, मंगलसूत्र, नथ और करीब 20 तोले चांदी के आभूषण। पल भर में अशरफ चाहें तो किस्मत बदल सकते थे, लेकिन उन्होंने जो किया, वही उन्हें भीड़ से अलग बनाता है।
“हराम का एक रुपया भी मंजूर नहीं”
अशरफ मिया ने गहनों को अपने पास रखने के बजाय असली मालिक तक पहुंचाने का फैसला किया। जानकारी जुटाई, आसपास पूछताछ की और आखिरकार चांदनी कुमारी से संपर्क कर पूरा जेवर सुरक्षित लौटा दिया।
गहने वापस पाकर परिवार की आंखें नम हो गईं। चांदनी ने कहा, “हमें तो याद भी नहीं था कि गहने अलमारी में रखे हैं। अगर अशरफ भाई चाह लेते तो सब रख सकते थे, लेकिन उन्होंने इंसानियत निभाई।”
रमज़ान में सवाब का काम
रमज़ान के पवित्र महीने में अशरफ मिया का यह कदम इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे लोग ही समाज में भरोसे की डोर मजबूत रखते हैं।
आज जब छोटी-सी लालच इंसान को रास्ता भटका देती है, वहां अशरफ मिया ने साबित कर दिया कि ईमान सबसे बड़ी दौलत है।
रमज़ान में किया गया यह नेक काम न सिर्फ सवाब बना, बल्कि इंसानियत का पैगाम भी दे गया — कि सच्चाई और भरोसा अभी जिंदा है।
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