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57 की उम्र में ई-रिक्शा थामकर परिवार का सहारा बनीं गौरा देवी; बेटे और पति को खोने के बाद भी नहीं मानी हार

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टनकपुर (8 मार्च 2026): चंपावत जिले के बोरागोठ क्षेत्र की रहने वाली गौरा देवी ने साबित कर दिया है कि हौसलों के आगे उम्र और रूढ़ियां कोई मायने नहीं रखतीं। आज वह न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि समाज की उन बेड़ियों को भी तोड़ रही हैं जो महिलाओं को कुछ खास पेशों तक सीमित रखती हैं।

संघर्षों का सफर: जब दुखों का पहाड़ टूटा

गौरा देवी का जीवन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा है:

  • बेटे का निधन: करीब 8 वर्ष पहले उनके बड़े बेटे विनोद राम की कैंसर से मृत्यु हो गई। बेटे के पीछे उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी गौरा देवी पर आ गई।

  • कर्ज का बोझ: बेटे ने ई-रिक्शा के लिए लोन लिया था। उसकी मृत्यु के बाद किस्तें चुकाना असंभव हो गया और घर तक बिकने की नौबत आ गई।

  • पति का साथ और बिछोह: उनके पति कल्लू राम ने उन्हें ई-रिक्शा चलाना सिखाया, लेकिन बदकिस्मती से दो साल बाद उनका भी निधन हो गया।

आत्मनिर्भरता की नई राह

49 वर्ष की उम्र में, जब लोग आराम की सोचते हैं, गौरा देवी ने ई-रिक्शा के हैंडल को मजबूती से थामा। शुरुआत में समाज और परिवार की हिचक के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

  • वर्तमान स्थिति: आज वह टनकपुर की सड़कों पर आत्मविश्वास के साथ ई-रिक्शा चलाती हैं।

  • पूर्णागिरि मेला: वर्तमान में चल रहे प्रसिद्ध पूर्णागिरि मेले में वह टनकपुर से पूर्णागिरि के बीच श्रद्धालुओं को सेवा दे रही हैं।


आर्थिकी और सम्मान: एक नज़र में (Snapshot)

विवरण जानकारी
नाम गौरा देवी (उम्र 57 वर्ष)
दैनिक आय ₹600 से ₹800 तक
कार्य क्षेत्र टनकपुर से पूर्णागिरि मार्ग
प्रेरणा परिवार की जिम्मेदारी और कर्ज मुक्ति
सम्मान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संस्थाओं द्वारा सम्मानित

समाज के लिए संदेश

गौरा देवी कहती हैं कि शुरुआत में सड़क पर उतरने में झिझक हुई, लेकिन अब वह ‘धड़ल्ले’ से रिक्शा चलाती हैं। उनकी इस हिम्मत को देखकर स्थानीय कलाकारों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने उन्हें कई बार सम्मानित भी किया है।

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