लालकुआं: सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के नाले से फैलने वाले प्रदूषण के मुद्दे पर मंगलवार को तहसील परिसर में जमकर हंगामा हुआ। एक ओर जहाँ कुछ स्थानीय युवा मिल के खिलाफ धरने पर बैठे थे, वहीं दूसरी ओर दर्जनों महिलाओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे ‘राजनीति’ करार दिया।
🪧 युवाओं का धरना और प्रदूषण का आरोप
स्थानीय युवाओं के एक समूह ने मंगलवार सुबह तहसील परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू किया। उनकी मुख्य मांगें और आरोप थे:
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प्रदूषण: सेंचुरी मिल से निकलने वाले नाले के कारण क्षेत्र में गंदगी और बीमारियां फैल रही हैं।
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मानक: प्रदर्शनकारियों का दावा है कि मिल प्रबंधन प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन नहीं कर रहा है।
👩💼 महिलाओं का ‘जुलूस’ और पलटवार
युवाओं का धरना शुरू होने के कुछ ही देर बाद नगर की महिलाएं एकजुट होकर वहां पहुँचीं और धरनारत युवाओं का कड़ा विरोध शुरू कर दिया। महिलाओं के विरोध के मुख्य बिंदु थे:
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रोजी-रोटी पर संकट: महिलाओं ने आरोप लगाया कि प्रदूषण के नाम पर प्रदर्शन करने वाले लोग असल में गरीबों की आजीविका छीनने का प्रयास कर रहे हैं।
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रोजगार का आधार: महिलाओं का कहना है कि सेंचुरी मिल से उन्हें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है, जिससे उनके घर का चूल्हा जलता है।
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नारेबाजी: महिलाओं ने “नेतागिरी बंद करो” और “नेतागिरी नहीं चलेगी” जैसे नारों के साथ तहसील परिसर में जुलूस निकाला।
⚡ तीखी बहस और चेतावनी
तहसील परिसर में माहौल तब और तनावपूर्ण हो गया जब महिलाओं और प्रदर्शनकारी युवाओं के बीच आमने-सामने की बहस हुई।
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महिलाओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि धरना तुरंत समाप्त नहीं किया गया, तो वे स्वयं बड़ी संख्या में वहां बैठकर प्रदर्शनकारियों का विरोध करेंगी।
🏭 मिल प्रबंधन का पक्ष
इस पूरे विवाद के बीच सेंचुरी मिल प्रबंधन ने अपना रुख स्पष्ट किया है:
“मिल में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी आधुनिक उपकरण स्थापित हैं। हम सरकारी मानकों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित कर रहे हैं।”
📋 घटना का संक्षिप्त विवरण
| पक्ष | स्टैंड / तर्क |
| प्रदर्शनकारी युवा | मिल का नाला प्रदूषण फैला रहा है, जिसे रोकना जरूरी है। |
| स्थानीय महिलाएं | विरोध प्रदर्शन केवल ‘नेतागिरी’ है, जिससे रोजगार प्रभावित होता है। |
| मिल प्रबंधन | प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानकों का अनुपालन किया जा रहा है। |
निष्कर्ष: लालकुआं में विकास और पर्यावरण के बीच का यह संघर्ष अब स्थानीय राजनीति और जनभावनाओं के बीच उलझ गया है। प्रशासन के लिए अब दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
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