
राजू अनेजा ,काशीपुर। एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं। गैस की कमी की आशंका से लोग जल्दबाजी में सिलेंडर बुक करने की कोशिश कर रहे हैं और इसी घबराहट का फायदा उठाकर ठग इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं।
जानकारी के अनुसार एलपीजी बुकिंग से जुड़ी जानकारी इंटरनेट पर सर्च करने वाले लोगों को साइबर अपराधी खास तौर पर टारगेट कर रहे हैं। इसके लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी विज्ञापन और लिंक शेयर किए जा रहे हैं। इन विज्ञापनों में तत्काल गैस सिलेंडर डिलीवरी या इमरजेंसी गैस सप्लाई जैसे लुभावने दावे किए जाते हैं, जिससे लोग जल्दबाजी में इन पर क्लिक कर देते हैं।
साइबर अपराधी बिल्कुल असली जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट भी बना रहे हैं। जब लोग गूगल पर गैस बुकिंग की वेबसाइट या हेल्पलाइन नंबर सर्च करते हैं तो कई बार ये फर्जी लिंक सबसे ऊपर दिखाई देते हैं। कई लोग बिना जांच-पड़ताल किए इन वेबसाइट्स पर दिए गए पेमेंट लिंक पर क्लिक कर देते हैं और समझते हैं कि उनका गैस सिलेंडर बुक हो गया है, जबकि असल में वे ठगी का शिकार बन जाते हैं।
इन फर्जी वेबसाइट्स में दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने पर उपभोक्ताओं से ओटीपी, बैंक अकाउंट नंबर, यूपीआई आईडी या अन्य निजी जानकारी मांगी जाती है। जैसे ही उपभोक्ता यह जानकारी साझा करते हैं, साइबर ठग उनके खाते से पैसे निकाल लेते हैं।
ऐसे करें बचाव
गैस सिलेंडर की बुकिंग हमेशा अपनी गैस कंपनी के आधिकारिक मोबाइल एप या वेबसाइट से ही करें।
किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक अकाउंट या कार्ड डिटेल्स साझा न करें।
सोशल मीडिया या गूगल पर दिखने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
ठगी का शिकार होने पर क्या करें
यदि गलती से किसी फर्जी लिंक पर भुगतान हो जाए तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें। ऐसी स्थिति में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर घटना की जानकारी दें। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन लेन-देन के दौरान थोड़ी सी सावधानी बरतकर ही ऐसे साइबर ठगी के मामलों से बचा जा सकता है।