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2027 से पहले तराई में सियासी चक्रव्यूह: उधम सिंह नगर में घिरती भाजपा, क्या कांग्रेस साध पाएगी सत्ता का मौका?

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राजू अनेजा,काशीपुर। वर्तमान में उत्तराखंड आगामी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की चौखट पर खड़ा हुआ है ऐसे में उत्तराखंड की सियासत में निर्णायक भूमिका निभाने वाला उधम सिंह नगर जिला एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल का केंद्र बनता नजर आ रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा जहां अंदरूनी विरोध, असंतोष और संभावित सियासी गठजोड़ों के चक्रव्यूह में फंसती दिख रही है, वहीं कांग्रेस इस हालात को सत्ता में वापसी के सुनहरे अवसर के रूप में देख रही है।

 

 

2022 का चुनावी गणित: गृह जनपद में भी फिसली भाजपा

आपको बताते चले कि 2022 के विधानसभा चुनाव में उधम सिंह नगर जिले की जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर, किच्छा, सितारगंज, नानकमत्ता और खटीमा — कुल 9 विधानसभा सीटों में से भाजपा केवल 4 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई थी।
हैरानी की बात यह रही कि यह जिला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गृह क्षेत्र होने के बावजूद भाजपा अपनी साख को पूरी तरह भुना नहीं पाई, और खुद मुख्यमंत्री को खटीमा सीट से हार का सामना करना पड़ा। जो काफी चर्चा का विषय बना था हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाद में चंपावत सीट से बंपर वोटो से विजय हासिल की थी।

 

वर्तमान विधायकों की स्थिति पर नजर डालें तो—
जसपुर: आदेश सिंह चौहान
काशीपुर: त्रिलोक सिंह चीमा
बाजपुर: यशपाल आर्य
गदरपुर: अरविंद पांडे
रुद्रपुर: शिव अरोरा
किच्छा: तिलक राज बेहड़
सितारगंज: सौरभ बहुगुणा
नानकमत्ता: गोपाल सिंह राणा
खटीमा: भुवन कापड़ी

कांग्रेस की तैयारी, भाजपा की परेशानी

राजनीतिक जानकारों की मानें तो कांग्रेस इस बार हर सीट पर मजबूत चेहरों के साथ मैदान में उतरने की रणनीति पर काम कर रही है। भाजपा से बाहर चल रहे पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल को वर्तमान में सियासी  पिच पर उतरने के लिए एक मजबूत पार्टी की तलाश है ऐसे में रुद्रपुर से राजकुमार ठुकराल की संभावित वापसी और गदरपुर सीट पर राजनीतिक उलटफेर की स्थिति में अरविंद पांडे जैसे कद्दावर नेता को कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने की अटकलें भाजपा की चिंता बढ़ा रही हैं।

अरविंद पांडे बनाम सरकार: सियासी संकेत साफ

गदरपुर विधायक अरविंद पांडे और राज्य सरकार के बीच चल रहा टकराव 2027 से पहले बड़े राजनीतिक संकेत दे रहा है। वहीं किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और अरविंद पांडे की संभावित ‘तराई की तिकड़ी’ भाजपा के लिए आने वाले समय में गंभीर सिरदर्द साबित हो सकती है।
भाजपा के लिए चुनौती, कांग्रेस के लिए मौका
हालांकि चुनाव में अभी समय है, लेकिन मौजूदा सियासी हालात साफ इशारा कर रहे हैं कि यदि भाजपा ने असंतोष को समय रहते नहीं साधा, तो उधम सिंह नगर में उसे अपनी मौजूदा सीटें बचाने के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
वहीं कांग्रेस इस मौके को भुनाने में सफल होती है या नहीं, यह आने वाले महीनों की सियासी चालों पर निर्भर करेगा।
अब बड़ा सवाल यही है —
क्या भाजपा तराई में अपनी खोई जमीन वापस ले पाएगी, या फिर तराई के तीन शेरों की सियासी तिकड़ी में उलझकर रह जाएगी?

 

क्रमशः

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