
मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई तेज, डेयरी यूनिट से लेकर गोदाम, होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों तक होगी जांच
राजू अनेजा,देहरादून। दूध और दूध से बने उत्पादों के नाम पर उपभोक्ताओं के साथ धोखा करने वालों के खिलाफ उत्तराखंड सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर नकली और गैर-दुग्ध डेयरी उत्पादों के कारोबार पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। अब ऐसे उत्पादों के निर्माण से लेकर उनके भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री तक पर खाद्य सुरक्षा विभाग की पैनी नजर रहेगी।
सरकार की इस कार्रवाई का सीधा निशाना उन कारोबारियों पर है, जो असली डेयरी उत्पादों की शक्ल और नाम का इस्तेमाल कर गैर-दुग्ध सामग्री से तैयार उत्पाद बाजार में बेचते हैं। खासकर पनीर, क्रीम, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पादों के नाम पर बेचे जाने वाले नकली अथवा एनालॉग उत्पाद जांच के दायरे में होंगे।
दूध के नाम पर अब गैर-दुग्ध माल बेचने का खेल नहीं चलेगा
डेयरी उत्पादों में मिलावट और नकली उत्पादों की बिक्री उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ सीधे तौर पर जुड़ा मामला है। कई बार बाजार में ऐसा उत्पाद पनीर या अन्य डेयरी उत्पाद जैसा दिखाई देता है, लेकिन उसकी वास्तविक संरचना अलग होती है। ऐसे उत्पादों की पहचान और उनके सही लेबलिंग को लेकर सरकार ने सख्ती का रुख अपनाया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग अब यह जांच करेगा कि किसी उत्पाद को जिस नाम से बेचा जा रहा है, वह वास्तव में उसी श्रेणी का उत्पाद है या नहीं। यदि किसी उत्पाद की पहचान और उसकी वास्तविक सामग्री के बीच अंतर पाया गया तो संबंधित कारोबारी पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डेयरी प्लांट से मिठाई की दुकान तक होगी नजर
सरकार के निर्देशों के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेगी। डेयरी यूनिट, उत्पादन केंद्र, गोदाम, थोक बाजार, होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकान और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी।
संदिग्ध उत्पाद मिलने पर उनके नमूने लिए जा सकते हैं और प्रयोगशाला जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई होगी।
निर्माण से लेकर बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन रडार पर
सरकार का जोर केवल बाजार में नकली उत्पाद पकड़ने पर नहीं, बल्कि उसकी पूरी सप्लाई चेन तक पहुंचने पर है। यानी उत्पाद कहां तैयार हुआ, कहां रखा गया, किस माध्यम से बाजार तक पहुंचा और किस प्रतिष्ठान पर बेचा जा रहा है, इसकी भी जांच की जाएगी।
इससे उन कारोबारियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है जो दूसरे स्थानों से संदिग्ध उत्पाद मंगाकर उन्हें असली डेयरी उत्पाद बताकर ग्राहकों को बेचते हैं।
त्योहारों के सीजन में और बढ़ेगी चुनौती
त्योहारी सीजन में दूध, पनीर, मक्खन, क्रीम और मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ती है। मांग बढ़ने के साथ ही मिलावट और नकली खाद्य पदार्थों की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार का यह कदम उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान उत्पादों की गुणवत्ता, लेबलिंग, स्रोत और निर्धारित मानकों का पालन किए जाने की भी जांच की जाएगी।
मिलावटखोरों को साफ संदेश—सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
धामी सरकार की इस सख्ती को उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का संदेश साफ है कि दूध और डेयरी उत्पादों के नाम पर गैर-दुग्ध या मानकविहीन उत्पाद बेचकर उपभोक्ताओं को भ्रमित करने का खेल अब आसानी से नहीं चलेगा।
अब निगाह इस बात पर होगी कि खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें राज्यभर में कितनी तेजी से अभियान चलाती हैं और जांच के दौरान कितने संदिग्ध उत्पाद सामने आते हैं। यदि नमूनों में गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित कारोबारियों पर कार्रवाई के साथ-साथ ऐसे उत्पादों की सप्लाई चेन पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
सरकार की सख्ती से मिलावटखोरों में हड़कंप
डेयरी उत्पाद रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा हैं और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक इनका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में दूध और उससे बने उत्पादों की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। धामी सरकार के निर्देश के बाद अब खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई पर सबकी नजर है।
यानी अब दूध के नाम पर ‘सफेद जहर’ का कारोबार करने वालों के लिए रास्ता आसान नहीं होगा—निर्माण से लेकर बाजार में बिक्री तक हर कड़ी सरकार की निगरानी में होगी।
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