
राजू अनेजा, हल्द्वानी।हल्द्वानी में सड़क सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। औचक निरीक्षण में कई ऐसे प्रशिक्षण केंद्रों की पोल खुली, जो बिना मानकों और संसाधनों के ही लोगों को ड्राइविंग प्रशिक्षण प्रमाण पत्र बांट रहे थे। कार्रवाई के बाद वाहन प्रशिक्षण कारोबार में हड़कंप मचा हुआ है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी विवेक राय और सम्भागीय परिवहन अधिकारी गुरूदेव सिंह ने हल्द्वानी के कई मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और सड़क सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
कहीं ट्रेनिंग ट्रैक नहीं, कहीं जरूरी उपकरण गायब
निरीक्षण के दौरान कई संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिलीं। कहीं प्रशिक्षण वाहन मानकों पर खरे नहीं उतरे तो कहीं ड्राइविंग सिखाने के लिए जरूरी उपकरण ही नदारद मिले। कुछ संस्थानों में रिकॉर्ड अधूरे पाए गए, जबकि कुछ जगहों पर प्रशिक्षकों की योग्यता को लेकर भी सवाल उठे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इन कमियों के बावजूद प्रशिक्षण केंद्र धड़ल्ले से ड्राइविंग सर्टिफिकेट जारी कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना सही प्रशिक्षण के कितने लोग सड़कों पर वाहन दौड़ा रहे होंगे।
दो संस्थानों को नोटिस, एक सेंटर बंद
निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर प्रशासन ने दो मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों को नोटिस जारी किया है। वहीं एक प्रशिक्षण केंद्र को अगले आदेश तक बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि नियमों से खिलवाड़ करने वाले संस्थानों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
सड़क सुरक्षा के साथ खिलवाड़!
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि बिना मानकों के चल रहे ऐसे ट्रेनिंग स्कूल सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। अधूरी ट्रेनिंग लेकर लाइसेंस पाने वाले चालक न सिर्फ खुद की बल्कि दूसरों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं।
“सीधे RTO कार्यालय से कराएं काम”
अपर जिलाधिकारी विवेक राय ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि परिवहन विभाग से जुड़े कार्य सीधे आरटीओ कार्यालय के माध्यम से ही कराएं। किसी एजेंट, दलाल या संदिग्ध ट्रेनिंग सेंटर के झांसे में आने से बचें। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे संस्थानों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
अब उठ रहे बड़े सवाल
बिना संसाधनों के कैसे चल रहे थे ट्रेनिंग स्कूल?
क्या जांच के नाम पर पहले सिर्फ खानापूर्ति होती रही?
क्या फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे बन रहे हैं कच्चे चालक?
आखिर किसकी शह पर चल रहा था यह खेल?
हल्द्वानी में हुई इस कार्रवाई के बाद अब अन्य जिलों के मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल भी प्रशासन की रडार पर आ गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई और संस्थानों पर गाज गिर सकती है।