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विधायक के पुत्र से जुड़े भूमि विवाद में जिलाधिकारी का बड़ा एक्शन; जांच के लिए गठित की उच्च स्तरीय समिति, 15 दिन में माँगी रिपोर्ट

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रुद्रपुर/बाजपुर (26 अप्रैल 2026): उधम सिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बाजपुर तहसील के ग्राम सैंमलपुरी में भूमि हस्तांतरण से जुड़े एक विवादित मामले में कड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में गदरपुर से भाजपा विधायक अरविंद पांडे के पुत्र अतुल पांडे का नाम आने के बाद प्रशासन ने निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला बाजपुर की ग्राम सैंमलपुरी की निवासी नन्नी देवी (पत्नी स्वर्गीय तुला सिंह) की शिकायत के बाद सुर्खियों में आया। शिकायत के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • नियमों के विपरीत हस्तांतरण: आरोप है कि वर्ष 2010-11 में खाता संख्या 20 की भूमि को नियमों को ताक पर रखकर हस्तांतरित किया गया।

  • ST भूमि का मामला: शिकायतकर्ता के अनुसार, यह भूमि अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से संबंधित थी। नियमानुसार, जनजाति की भूमि को किसी सामान्य वर्ग के व्यक्ति के नाम ट्रांसफर नहीं किया जा सकता, फिर भी यह जमीन अतुल कुमार पांडे के नाम दर्ज कर दी गई।

  • न्यायालय के आदेश की अवहेलना: नन्नी देवी का दावा है कि इस मामले में कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आने के बावजूद राजनीतिक रसूख के कारण उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका।

जिलाधिकारी ने गठित की ‘जांच समिति’

मामले की गंभीरता और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एक विशेष समिति बनाई है जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। समिति का ढांचा इस प्रकार है:

  1. अध्यक्ष: एडीएम (वित्त/राजस्व)

  2. सदस्य सचिव: एसडीएम बाजपुर

  3. सदस्य: बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी

  4. सदस्य: जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी

प्रशासन का कड़ा रुख

जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने स्पष्ट किया है कि जांच समिति शिकायत के हर तकनीकी और कानूनी पहलू की गहनता से पड़ताल करेगी। आदेश में कहा गया है कि यदि भूमि हस्तांतरण में किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या पद का दुरुपयोग पाया जाता है, तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

प्रभावशाली परिवार से जुड़ा मामला

चूँकि यह विवाद एक पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक के परिवार से जुड़ा है, इसलिए पूरे जिले की निगाहें इस जांच पर टिकी हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ‘प्रभावशाली परिवार’ होने के कारण अब तक प्रशासनिक स्तर पर उचित कार्रवाई नहीं हो पाई थी, लेकिन अब जिलाधिकारी के कड़े रुख से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।

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