
राजू अनेजा, काशीपुर। चैती मेले से ठीक पहले शहर के ऐतिहासिक तीर्थ द्रोणा सागर और काशीपुर चैती मेला परिसर के आसपास दहशत फैलाने वाला एक और तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। सोमवार सुबह करीब छह बजे गोविषाण टीला क्षेत्र में लगाए गए पिंजरे में तेंदुआ फंस गया, जिसके बाद इलाके में राहत की सांस ली गई।
4–5 साल से तेंदुओं का आतंक
द्रोणासागर और चैती मेला परिसर से सटे गोविषाण टीला क्षेत्र में पिछले चार से पांच वर्षों से तेंदुओं की मौजूदगी से लोग दहशत में हैं। क्षेत्र में रह रहे तेंदुए कई पालतू और लावारिस कुत्तों को अपना शिकार बना चुके हैं, जिससे आसपास के इलाकों में लगातार भय का माहौल बना रहता है।
अब तक छह तेंदुए पकड़े जा चुके
स्थानीय पार्षद अनिल कुमार और भारतीय पुरातत्व विभाग के कर्मचारी रंजीत सिंह बिष्ट ने बताया कि इससे पहले भी वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरों में पांच तेंदुए पकड़े जा चुके हैं। एक फरवरी को पांचवां तेंदुआ पकड़ा गया था, जबकि सोमवार को छठा तेंदुआ पिंजरे में कैद हुआ है।
कुछ दिन पहले एक साथ दिखे थे दो तेंदुए
क्षेत्रवासियों के अनुसार पिछले तीन-चार दिनों से इलाके में तेंदुओं की गतिविधि बढ़ गई थी। करीब चार दिन पहले ब्लॉक कार्यालय के सामने वाली गली में एक साथ दो तेंदुए देखे गए थे, जिसके बाद लोगों में डर और बढ़ गया था।
मेले से पहले बढ़ी थी चिंता
19 मार्च से शुरू होने वाले काशीपुर चैती मेला को देखते हुए स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई थी, क्योंकि मेले के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
वन विभाग अलर्ट, दो और तेंदुओं की आशंका
वन विभाग का अनुमान है कि इस इलाके में अभी दो तेंदुए और हो सकते हैं। ऐसे में विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर और पिंजरे लगाने की तैयारी भी की जा रही है।
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