
देहरादून। उत्तराखंड सरकार स्वास्थ्य विभाग में दवाओं, सर्जिकल सामग्री और अन्य चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ‘मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन’ का गठन करने जा रही है। इस कारपोरेशन के माध्यम से प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं और उपकरणों की केंद्रीकृत खरीद की जाएगी, जिसका अंतिम फैसला आगामी कैबिनेट बैठक में लिया जाएगा। वर्तमान में अस्पतालों में अलग-अलग स्तरों पर होने वाली खरीद के कारण दरों में भिन्नता, आपूर्ति में देरी और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कारपोरेशन बनने के बाद ई-टेंडरिंग, गुणवत्ता परीक्षण, राज्य स्तरीय वेयरहाउस और डिजिटल स्टॉक प्रबंधन जैसी आधुनिक व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे तमिलनाडु व राजस्थान की तर्ज पर सरकारी धन की बचत होगी और अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
जिन जिलों में बने मेडिकल कॉलेज, वहां के जिला अस्पताल बड़े कस्बों में होंगे स्थानांतरित
इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने एक और बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए जिला अस्पतालों के पुनर्गठन की योजना बनाई है। विभाग का मानना है कि जिन जिला मुख्यालयों पर पहले से मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, वहां अलग से जिला अस्पताल चलाने के बजाय उन्हें आसपास के ऐसे दूरस्थ या बड़े कस्बों में स्थानांतरित किया जाए जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की अधिक आवश्यकता है। प्रस्तावित मसौदे के तहत हरिद्वार के जिला अस्पताल को रुड़की और देहरादून के जिला अस्पताल को विकासनगर स्थानांतरित किए जाने की योजना है। इसी प्रकार अन्य जिलों में भी जिला मुख्यालयों के बजाय बड़े कस्बों में जिला अस्पताल स्थापित किए जाएंगे।
पारदर्शिता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं हैं प्राथमिकता: स्वास्थ्य मंत्री
मामले पर जानकारी देते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि सरकार दवाओं व चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन गठित करने जा रही है। वहीं जिन जिला मुख्यालयों में मेडिकल कॉलेज बन चुके हैं, वहां के जिला अस्पतालों को दूरस्थ क्षेत्रों में शिफ्ट करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिस पर शीघ्र ही शासन स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।